16 साल तक नहीं खाया अन्न, फिर भी रही जिंदा! कौन हैं इरोम शर्मिला, जिनकी वांगचुक के अनशन के बीच हो रही चर्चा
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इन दिनों अपने अनशन को लेकर सुर्खियों में हैं। वह 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लगातार कई दिनों से भोजन न करने के कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई जा रही है। इसी बीच एक नाम फिर चर्चा में है, जो 16 साल तक बिना अन्न खाए अनशन पर रही। आइए जानते है कि कौन है वो महिला और सबसे लंबे भूख हड़ताल की कहानी?
भारत की सबसे लंबी भूख हड़ताल किसने की थी?
भारत में सबसे लंबी भूख हड़ताल का रिकॉर्ड इरोम चानू शर्मिला के नाम दर्ज है। उन्हें 'आयरन लेडी ऑफ मणिपुर' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम यानी AFSPA को हटाने की मांग को लेकर लगभग 16 वर्षों तक अनशन किया। उनका आंदोलन पूरी तरह अहिंसक था और इसने देश-दुनिया का ध्यान मानवाधिकारों के मुद्दे की ओर खींचा।
क्यों शुरू किया था अनशन?
2 नवंबर 2000 को मणिपुर के मालोम इलाके में हुई एक घटना, जिसे मालोम नरसंहार कहा जाता है, ने इरोम शर्मिला को झकझोर दिया। आरोप था कि असम राइफल्स की कार्रवाई में 10 आम नागरिकों की मौत हो गई थी। इस घटना के विरोध में उन्होंने 5 नवंबर 2000 से आमरण अनशन शुरू कर दिया।
इरोम शर्मिला का कहना था कि AFSPA सुरक्षा बलों को व्यापक अधिकार देता है, जिससे मानवाधिकारों के उल्लंघन की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, इस कानून के समर्थकों का तर्क है कि अशांत क्षेत्रों में सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह कानून आवश्यक है।
दुनिया की सबसे लंबी राजनीतिक भूख हड़ताल
इरोम शर्मिला का अनशन 5 नवंबर 2000 से 9 अगस्त 2016 तक चला। यानी करीब 16 साल या 5,793 दिन। इसे दुनिया की सबसे लंबी राजनीतिक भूख हड़तालों में गिना जाता है।
16 साल तक बिना भोजन के कैसे रहीं जीवित?
उस समय आत्महत्या का प्रयास भारतीय कानून के तहत अपराध माना जाता था। इसलिए प्रशासन उन्हें समय-समय पर हिरासत में लेता था। न्यायिक हिरासत के दौरान अस्पताल में डॉक्टर उन्हें नाक में डाली गई नासोगैस्ट्रिक ट्यूब के जरिए तरल पोषण और दवाइयां देते थे। इसी कृत्रिम पोषण के सहारे उन्हें जीवित रखा गया। हालांकि उन्होंने पूरे आंदोलन के दौरान स्वेच्छा से भोजन नहीं किया।
'आयरन लेडी ऑफ मणिपुर' क्यों कहा गया?
लगातार 16 वर्षों तक अपने फैसले पर अडिग रहने और अहिंसक आंदोलन जारी रखने के कारण इरोम शर्मिला को 'आयरन लेडी ऑफ मणिपुर' की उपाधि मिली। उनके संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और कई मानवाधिकार संगठनों ने उनका समर्थन किया।
अनशन खत्म करने के बाद क्या हुआ?
करीब 16 साल बाद इरोम शर्मिला ने महसूस किया कि केवल अनशन के जरिए वह राजनीतिक बदलाव नहीं ला सकीं जिसकी उन्हें उम्मीद थी। इसके बाद 9 अगस्त 2016 को उन्होंने शहद चखकर अपना अनशन समाप्त किया और लोकतांत्रिक राजनीति के जरिए अपनी लड़ाई आगे बढ़ाने का फैसला किया।
उन्होंने पीपुल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस (PRJA) नाम से राजनीतिक दल बनाया और 2017 के मणिपुर विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा। हालांकि उन्हें महज 90 वोट मिले और चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली।
अब कहां हैं इरोम शर्मिला?
राजनीति से अलग होने के बाद इरोम शर्मिला ने अपने लंबे समय के ब्रिटिश मित्र डेसमंड कुटिन्हो से विवाह किया। वर्तमान में वह बेंगलुरु में अपने पति और बच्चों के साथ रहती हैं। उन्होंने कई साक्षात्कारों में कहा है कि भले ही वह सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी चिंता आज भी बनी हुई है।