मेलोडी खाओ खुद जान जाओ...PM मोदी के गिफ्ट के बाद फिर चर्चा में आई Melody टॉफी, जानिए किसने लिखी थी ये लाइन
May 20, 2026, 20:36 IST
मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ…90 के दशक की यह मशहूर लाइन एक बार फिर सोशल मीडिया पर छा गई है। वजह बने प्रधानमंत्री Narendra Modi, जिन्होंने इटली दौरे के दौरान इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni को Melody टॉफी का पैकेट गिफ्ट किया।
इस खास पल का वीडियो खुद जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद Melody टॉफी और उसका आइकॉनिक जिंगल फिर से चर्चा में आ गया।
90 के दशक में बनी थी पहचान
Melody टॉफी बनाने वाली कंपनी Parle Products है। 90 के दशक में जब बाजार में फ्रूट फ्लेवर कैंडी का दबदबा था, तब कंपनी ने Melody को एक “चॉकलेटी टॉफी” के तौर पर पेश किया।
टॉफी की खासियत उसका डबल लेयर डिजाइन था। बाहर कैरमल और अंदर चॉकलेट फ्लेवर ने बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी आकर्षित किया। लेकिन इसकी असली पहचान बनी इसकी यादगार टैगलाइन— “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।”
किसने लिखी थी यह लाइन?
Melody की ब्रांडिंग की जिम्मेदारी उस समय मार्केटिंग एजेंसी Everest को दी गई थी। चुनौती थी कि इस टॉफी को सिर्फ साधारण कैंडी नहीं, बल्कि चॉकलेट प्रोडक्ट के रूप में बच्चों के बीच लोकप्रिय बनाया जाए।
क्रिएटिव टीम का नेतृत्व हरेश मूरजानी कर रहे थे। इसी दौरान एक ऐसा आइडिया तैयार हुआ जिसमें बच्चे अपने पसंदीदा किरदारों या बड़े लोगों के सवाल का जवाब देते नजर आएं।
इसी कॉन्सेप्ट पर कॉपीराइटर Sulekha Bajpai ने यह मशहूर लाइन लिखी— “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।” यह टैगलाइन कंपनी को इतनी पसंद आई कि इसे पूरे कैंपेन का मुख्य हिस्सा बना दिया गया।
कैसे सुपरहिट हुआ विज्ञापन?
विज्ञापन की शुरुआत अक्सर इस सवाल से होती थी, मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है? इसके जवाब में एक बच्चा मुस्कुराते हुए कहता था- “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।”
अंत में जिंगल बजता था, मेलोडी है चॉकलेटी… मेलोडी है चॉकलेटी…”
यह कैंपेन इतना लोकप्रिय हुआ कि Melody सिर्फ एक टॉफी नहीं, बल्कि 90s की यादों का हिस्सा बन गई। अब पीएम मोदी के इटली दौरे के बाद यह लाइन एक बार फिर सोशल media पर ट्रेंड कर रही है।
इस खास पल का वीडियो खुद जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद Melody टॉफी और उसका आइकॉनिक जिंगल फिर से चर्चा में आ गया।
90 के दशक में बनी थी पहचान
Melody टॉफी बनाने वाली कंपनी Parle Products है। 90 के दशक में जब बाजार में फ्रूट फ्लेवर कैंडी का दबदबा था, तब कंपनी ने Melody को एक “चॉकलेटी टॉफी” के तौर पर पेश किया।
टॉफी की खासियत उसका डबल लेयर डिजाइन था। बाहर कैरमल और अंदर चॉकलेट फ्लेवर ने बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी आकर्षित किया। लेकिन इसकी असली पहचान बनी इसकी यादगार टैगलाइन— “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।”
किसने लिखी थी यह लाइन?
Melody की ब्रांडिंग की जिम्मेदारी उस समय मार्केटिंग एजेंसी Everest को दी गई थी। चुनौती थी कि इस टॉफी को सिर्फ साधारण कैंडी नहीं, बल्कि चॉकलेट प्रोडक्ट के रूप में बच्चों के बीच लोकप्रिय बनाया जाए।
क्रिएटिव टीम का नेतृत्व हरेश मूरजानी कर रहे थे। इसी दौरान एक ऐसा आइडिया तैयार हुआ जिसमें बच्चे अपने पसंदीदा किरदारों या बड़े लोगों के सवाल का जवाब देते नजर आएं।
इसी कॉन्सेप्ट पर कॉपीराइटर Sulekha Bajpai ने यह मशहूर लाइन लिखी— “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।” यह टैगलाइन कंपनी को इतनी पसंद आई कि इसे पूरे कैंपेन का मुख्य हिस्सा बना दिया गया।
कैसे सुपरहिट हुआ विज्ञापन?
विज्ञापन की शुरुआत अक्सर इस सवाल से होती थी, मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है? इसके जवाब में एक बच्चा मुस्कुराते हुए कहता था- “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।”
अंत में जिंगल बजता था, मेलोडी है चॉकलेटी… मेलोडी है चॉकलेटी…”
यह कैंपेन इतना लोकप्रिय हुआ कि Melody सिर्फ एक टॉफी नहीं, बल्कि 90s की यादों का हिस्सा बन गई। अब पीएम मोदी के इटली दौरे के बाद यह लाइन एक बार फिर सोशल media पर ट्रेंड कर रही है।