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सद्दाम हुसैन से लेकर चाउशेस्कु तक...शेख हसीना से पहले किन-किन नेताओं को हो चुकी हैं फांसी की सजा?

 

बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-ममून को 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी करार दिया है। अदालत ने तीन आरोपों में दोषी पाई गई शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई है। यह निर्णय कई महीनों तक चले ट्रायल के बाद सामने आया, जिसमें साबित हुआ कि हसीना ने छात्र विरोधों पर घातक कार्रवाई का आदेश दिया था। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब चर्चा इस बात की है कि विश्व इतिहास में इससे पहले किन-किन राष्ट्राध्यक्षों और बड़े नेताओं को मौत की सजा दी गई है। आइए नजर डालते हैं उन प्रमुख नामों पर...

1. सद्दाम हुसैन – इराक

दुनिया भर में सबसे चर्चित फांसी का मामला इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का रहा है। साल 2006 में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध, राजनीतिक दमन और नरसंहार के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई थी। उनके शासनकाल में शिया और कुर्द समुदायों पर बड़े पैमाने पर अत्याचार के मामले सामने आए थे। अमेरिका के हमले के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फांसी दी गई।

2. जुल्फिकार अली भुट्टो – पाकिस्तान

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को 4 अप्रैल 1979 को रावलपिंडी की जेल में फांसी दी गई थी। आरोप था कि भुट्टो ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की साजिश रची थी। हालांकि इस ट्रायल को बेहद विवादित और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित माना गया, क्योंकि यह फैसला जनरल जिया-उल-हक के सैन्य शासन में सुनाया गया था।

3. निकोलाए चाउशेस्कु – रोमानिया

रोमानिया के तानाशाह निकोलाए चाउशेस्कु ने लगभग 25 साल तक देश पर कठोर शासन किया। 1989 में पूरे देश में फैले विद्रोह के बीच वह गिरफ्तार हुए। कुछ घंटों के त्वरित सैन्य ट्रायल में उन्हें और उनकी पत्नी को जनसंहार, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों में दोषी पाया गया। फैसले के तुरंत बाद दोनों को फायरिंग स्क्वाड द्वारा मौत की सजा दे दी गई। यह यूरोप में तानाशाही के अंत का प्रतीक बन गया।

4. मतिउर रहमान निजामी – बांग्लादेश

बांग्लादेश के कट्टरपंथी दल जमात-ए-इस्लामी प्रमुख मतिउर रहमान निजामी को 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान युद्ध अपराध, हत्या और यातना जैसे मामलों में दोषी पाया गया था। विशेष अदालत ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई थी।