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97 साल पहले जौनपुर में गांधी जी से मिले जमींदार, पूछा- क्या दें उपहार? जवाब सुनकर मंगवाया कागजों से भरा बक्सा

2 अक्टूबर 1929 को महात्मा गांधी जौनपुर पहुंचे थे। रामसमंडल आवास पर हुए सम्मेलन के दौरान बाबू रामेश्वर प्रसाद सिंह ने गांधी जी से उपहार के बारे में पूछा। परिवार के अनुसार गांधी जी ने जमींदारी के कागजात मंगवाए और उन्हें जलाने का आह्वान किया। 97 साल पुराना यह प्रसंग आज फिर चर्चा में है।

 

Gandhi Jayanti: महात्मा गांधी 2 अक्टूबर 1929 को जौनपुर पहुंचे थे। इस दौरान शहर के रामसमंडल आवास पर उनका सम्मेलन हुआ था, जहां बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। परिवार से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इसी मुलाकात में गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर जमींदार परिवार ने जमींदारी से जुड़े कागजात आग के हवाले कर दिए थे। परिवार के मुताबिक, करीब 97 साल बाद भी उस घटना की यादें और इससे जुड़ा पुराना मकान मौजूद है।

डॉ. विमला सिंह के अनुसार, बाबू रामेश्वर प्रसाद सिंह गांधी जी को जौनपुर स्थित रामसमंडल आवास लेकर आए थे। उस समय परिवार का संबंध जमींदारी से था। गांधी जी के विचारों और उनके संदेश का परिवार पर गहरा असर पड़ा। इसी मुलाकात से जुड़ा एक प्रसंग आज भी परिवार में सुनाया जाता है।

गांधी जी से पूछा- क्या उपहार दें?

डॉ. विमला सिंह बताती हैं कि मुलाकात के दौरान बाबू रामेश्वर प्रसाद सिंह ने गांधी जी से पूछा कि उन्हें क्या उपहार दिया जाए। परिवार के अनुसार, गांधी जी ने धन या कोई दूसरी वस्तु लेने के बजाय जमींदारी से जुड़े कागजात वाला बक्सा मंगवाने को कहा।

परिवार के पास आज भी वह पुराना बक्सा मौजूद होने की बात कही जाती है। इसके बाद जमींदारी से संबंधित कागजात आंगन में लाए गए।

आंगन में जला दिए गए जमींदारी के कागजात

डॉ. विमला सिंह के मुताबिक, गांधी जी ने उन कागजात में माचिस लगा दी और कहा, ‘आज से जमींदारी खत्म है, जो जहां रहता है वहीं रहेगा।’

परिवार के अनुसार, गांधी जी के इस आह्वान को स्वीकार करते हुए जमींदारी से जुड़े कागजात जला दिए गए। उस समय परिवार की जमीन पर करीब 32 मकान बताए जाते हैं। डॉ. विमला सिंह का कहना है कि परिवार आज भी वहां रहने वाले लोगों के सहयोग की कोशिश करता है।

यह पूरा प्रसंग परिवार की ओर से बताई गई स्मृतियों और उस पुराने आवास से जुड़ा है। इसी वजह से जौनपुर में गांधी जी की यात्रा से जुड़ी इस कहानी को स्थानीय स्तर पर आज भी याद किया जाता है।

गांधी जयंती पर फिर चर्चा में आया 97 साल पुराना प्रसंग

2 अक्टूबर को हर साल गांधी जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में गांधी जयंती के मौके पर जौनपुर से जुड़ा यह पुराना प्रसंग एक बार फिर चर्चा में है।

डॉ. विमला सिंह का कहना है कि गांधी जी से जुड़ी इस घटना के बावजूद रामसमंडल आवास को वह पहचान नहीं मिल सकी है, जिसकी वह हकदार है। उनके अनुसार, पहले गांधी जयंती के आसपास लोग यहां पहुंचते थे और परिवार के पूर्वज बाबू साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते थे।

उन्होंने उम्मीद जताई कि जौनपुर प्रशासन गांधी जी की 1929 की यात्रा से जुड़े इस प्रसंग को संज्ञान में लेकर इस स्थान को उचित महत्व देगा।

सिर्फ भाषण नहीं, फैसले से जुड़ी है गांधी जी की यात्रा की याद

जौनपुर में गांधी जी की 1929 की यात्रा से जुड़ी यह कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि परिवार के मुताबिक, उस मुलाकात का असर केवल सम्मेलन या भाषण तक सीमित नहीं रहा। गांधी जी के सामने जमींदारी से जुड़े कागजात जलाने का फैसला लिया गया और परिवार ने उनके संदेश को स्वीकार किया।

करीब 97 साल बाद भी रामसमंडल आवास और परिवार में मौजूद पुरानी यादें इस प्रसंग को जौनपुर के इतिहास से जोड़ती हैं। गांधी जयंती पर यह कहानी एक बार फिर सामने आती है, जब देश महात्मा गांधी के विचारों और उनके स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद करता है।