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अरे भाई, यही तो अमृतकाल है...

 

अरे भाई, यही तो अमृतकाल है,
बस इतना याद रहे, यही कमाल है।

ना सिलेंडर के दाम पूछो,
ना पेट्रोल का भाव पूछो।
ना महँगाई का हाल पूछो।

ना शिक्षा पर सवाल करो...
ना अस्पतालों के हालात पूछो...

ना बेरोजगारी का जिक्र करो,
ना गरीबी की फिक्र करो,
ना नौकरी की आस करो
ना पेपर लीक पर सवाल करो,
बस हर खबर पर आँखें मूंदें, मौन होकर विश्वास करो।

यही तो अमृतकाल है...

ना किसान की पीड़ा देखो,
ना मजदूरों का लाचारी देखो..

बस ताली बजाओ, जय-जयकार करो, हर बात पर गुणगान करो...
जो बोले, उसको देशद्रोही करार करो।

जो पूछे सत्ता से सवाल तो उसे कटघरे में खड़ा कर बदनाम करो

जब तथ्यों से जवाब देना भारी पड़े, तो मुद्दे को कहीं और मोड़ दो,
इतिहास, धर्म या भावनाएँ सुना दो, हिंदू-मुस्लिम का राग अलाप दो...

कह दो- भाई हिंदुत्व खतरे में आ जाएगा...

बस बहस यहीं खत्म कर दो,
सवालों पर पर्दा कर दो,

क्योंकि... यही तो अमृतकाल है,
जहां सवाल करना बवाल है
और ताली बजाना कमाल है।।

लेखिका- अंकिता यादव