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ज्ञान भारतम और काशी, जहां ज्ञान और ....

 

"काशी" सिर्फ एक शहर नहीं, भारत की ज्ञान-चेतना का जीवंत प्रतीक है। और 'ज्ञान भारतम' मिशन इसी चेतना को 21वीं सदी की टेक्नोलॉजी से जोड़कर भारत को 'विश्व गुरु' बनाने का संकल्प है। जब ज्ञान भारतम की बात होती है, तो काशी अपने आप उसका केंद्र बन जाती है। क्योंकि काशी ने ही दुनिया को सिखाया कि ज्ञान का मतलब सिर्फ किताबी डिग्री नहीं, जीवन जीने की कला है।

1. ज्ञान भारतम मिशन क्या है?  
ज्ञान भारतम भारत सरकार का एक विजन है जिसके 3 मुख्य उद्देश्य हैं:
1. भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनर्जागरण: वेद, आयुर्वेद, योग, गणित, खगोल, संगीत को मॉडर्न साइंस से जोड़ना।
2. हर हाथ को हुनर: डिग्री के साथ स्किल, ताकि युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, देने वाले बनें।
3. डिजिटल सेतु: AI और इंटरनेट से ज्ञान को गाँव-गाँव, हर भाषा में पहुंचाना।
4. पांडुलिपियों का डिजिटल संग्रहण 

2. काशी = ज्ञान भारतम की प्रयोगशाला  

ज्ञान भारतम का लक्ष्य    

काशी में पहले से मौजूद उदाहरण

भारतीय ज्ञान परंपरा

BHU में संस्कृत + AI, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, 1000+ साल पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा

स्किल इंडिया   

हर मोहल्ला एक स्किल सेंटर: बनारसी साड़ी बुनकर, लकड़ी के खिलौने, गुलाबी मीनाकारी, तबला-शहनाई वादक

रिसर्च और इनोवेशन

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 150+ डिपार्टमेंट, IIT-BHU में टेक + ट्रेडिशन पर रिसर्च

एक भारत श्रेष्ठ भारत

काशी तमिल संगमम - 1000 साल पुराना नॉर्थ-साउथ कनेक्शन। यहाँ हर भाषा, हर राज्य के लोग बसते हैं

डिजिटल लाइब्रेरी

प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण शुरू, घाटों पर फ्री WiFi से स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं।

सीधा मतलब:

ज्ञान भारतम का रोल मॉडल काशी है।

3. काशी को ज्ञान भारतम से क्या मिलेगा?  

1. BHU बनेगा 'ग्लोबल डिजिटल यूनिवर्सिटी': काशी के प्रोफेसर ऑनलाइन पूरी दुनिया को संस्कृत, संगीत, ज्योतिष पढ़ाएंगे। एक बिहारी छात्र घर बैठे पं. छन्नूलाल मिश्रा से ठुमरी सीखेगा।
2. 'ODOP काशी' को बूस्ट: बनारसी साड़ी, लंगड़ा आम, पान, लकड़ी के खिलौने - हर प्रोडक्ट की ऑनलाइन ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट ट्रेनिंग। बुनकर AI सीखकर डिजाइन बनाएगा।
3. काशी वेडिंग + स्पिरिचुअल टूरिज्म: 'Wed in Kashi' और 'Study in Kashi' कैंपेन। दुनिया भर से लोग यहाँ शादी करने और रिसर्च करने आएंगे। लोकल इकोनॉमी को 1000 करोड़ का फायदा।
4. घाटों पर स्किल हब: दशाश्वमेध घाट पर नाविकों को टूरिस्ट गाइड + इंग्लिश स्पीकिंग की ट्रेनिंग। अस्सी घाट पर 'डिजिटल क्रिएटर हब' जहां यूट्यूबर काशी की कहानियां बनाएंगे।

4. काशी ज्ञान भारतम को क्या देगी?  

काशी सिर्फ लेगी नहीं, देगी भी। काशी का DNA ही ज्ञान भारतम का सिलेबस है:
1. जीवन दर्शन: मणिकर्णिका घाट सिखाता है कि मृत्यु अंत नहीं। ये सोच इनोवेशन के लिए जरूरी है - फेलियर से डरना बंद करो।
2. समावेशी संस्कृति: काशी में मंदिर के पास मस्जिद, बंगाली टोला के पास तमिल घर। ये 'एक भारत' का असली मॉडल है।
3. गुरु-शिष्य परंपरा: आज भी संगीत, संस्कृत, शिल्प घरानों में सीखा जाता है। यही 'मेंटॉरशिप मॉडल' ज्ञान भारतम पूरे देश में चाहता है।
 निष्कर्ष: काशी का फॉर्मूला = ज्ञान +संस्कार  

 

ज्ञान भारतम मिशन कहता है - 
    ' पढ़ो भी, गढ़ो भी'। 
 काशी कहती है - 
   'जीओ भी, सीखो भी'। 

काशी में शादी इसलिए खास है क्योंकि यहाँ दो लोग नहीं मिलते, दो परिवारों का ज्ञान, दो संस्कृतियों का अनुभव और बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद मिलता है। 
जब तक काशी में शहनाई बजेगी और सात फेरे होंगे, तब तक ज्ञान भारत मिशन का दिया जलता रहेगा। क्योंकि असली ज्ञान वो है जो जीवन को सुंदर बनाए। और काशी से सुंदर

जीवन कहाँ?

काशी के बिना ज्ञान भारतम अधूरा

ज्ञान भारतम अगर शरीर है तो काशी उसकी आत्मा है। सरकार टेक्नोलॉजी देगी, फंड देगी, पॉलिसी देगी। लेकिन 'ज्ञान क्यों चाहिए' इसका जवाब काशी देगी। 
काशी बताती है कि ज्ञान का मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं है। ज्ञान का मकसद है - 'सा विद्या या विमुक्तये' यानी वो विद्या जो मुक्ति दिलाए। बीमारी से, गरीबी से, अज्ञान से और अहंकार से मुक्ति।

इसलिए जब 2047 में भारत ज्ञान की महाशक्ति बनेगा, तो दुनिया कहेगी - "इसकी शुरुआत काशी के घाटों से हुई थी"।

रचनाकार - अमित श्रीवास्तव की कलम 🖋️📜 से-