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ममता की अंतिम बाँहें, नर्मदा की लहरों में....

 
ममता की अंतिम बाँहें
नर्मदा की लहरों में जब संकट घिर      
       ‌ आया।
हर ओर भय का काला साया छा 
       ‌ गया।
हृदय विदारक वह क्षण, समय भी 
     ‌‌ थम सा गया।
जब जीवन का दीप यूँ ही बुझ गया।
एक माँ ने तब ममता का स्वरूप 
          दिखाया।
अपने प्राणों से बढ़कर पुत्र को 
         अपनाया।
खुद को भुलाकर उसे सीने से 
         ‌ लगाया।
अंतिम साँस तक स्नेह का दीप 
           जलाए रखा।
लहरों ने छीना दोनों का यह संसार,
पर अमर हो गया माँ का पावन 
          ‌ प्यार।
वह दृश्य आज भी आँखों में भर
           आता है।
हर हृदय को भीतर तक झकझोर 
           जाता है।
संदेश यही है आने वाली हर पीढ़ी 
            को,
ममता, साहस और प्रेम रखो जीवन     
     मैं सदा ही संजोकर।
पर साथ ही सजगता का दीप भी    
      जालना,
सुरक्षा को अपना पहला धर्म 
       बनाना।