एक बेटी के प्यार से शुरू हुआ Mother’s Day, जानिए कैसे बना दुनिया भर का खास दिन और कैसे हुई इसकी शुरुआत
मां… एक ऐसा शब्द जिसमें प्यार, त्याग, ममता और पूरी दुनिया समाई होती है। हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाने वाला मदर्स डे सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि मां के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का खास दिन है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मदर्स डे (Mother’s Day) की शुरुआत कैसे हुई और इसे मई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है? इसके पीछे एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी छिपी हुई है।
मदर्स डे के पीछे की कहानी बेहद भावुक और प्रेरणादायक है, जिसने धीरे-धीरे पूरी दुनिया में एक खास दिन का रूप ले लिया।
अन्ना जार्विस ने की थी मदर्स डे की शुरुआत
Anna Jarvis को मदर्स डे की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है। वह अपनी मां Ann Reeves Jarvis से बेहद प्यार करती थी। उनकी मां एक सामाजिक कार्यकर्ता और शांति समर्थक थी, जिन्होंने अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान घायल सैनिकों की सेवा की थी।
एन रीव्स जार्विस की इच्छा थी कि दुनिया में एक ऐसा दिन हो, जो माताओं के त्याग और उनके योगदान को समर्पित हो।
मां की मौत के बाद शुरू हुआ संघर्ष
1905 में अन्ना जार्विस की मां का निधन हो गया। मां की मृत्यु के बाद अन्ना ने उनकी इच्छा को पूरा करने का संकल्प लिया। उन्होंने लोगों को यह समझाने की कोशिश की कि एक मां अपने बच्चों के लिए जो त्याग करती है, उसकी तुलना किसी और रिश्ते से नहीं की जा सकती। इसी सोच के साथ उन्होंने मदर्स डे को आधिकारिक मान्यता दिलाने के लिए अभियान शुरू किया।
मई का दूसरा रविवार ही क्यों चुना गया?
मदर्स डे मई के दूसरे रविवार को मनाने के पीछे भी एक खास वजह है। अन्ना जार्विस की मां का निधन 9 मई 1905 को हुआ था, जो उस साल मई का दूसरा रविवार था। अपनी मां की याद में अन्ना ने 1908 में वर्जीनिया के ग्राफ्टन में एक मेमोरियल सर्विस आयोजित की।
इस दौरान उन्होंने लोगों को अपनी मां का पसंदीदा फूल ‘सफेद कार्नेशन’ बांटा। यही फूल बाद में मदर्स डे का प्रतीक बन गया।
1914 में मिली आधिकारिक मान्यता
अन्ना जार्विस के लंबे संघर्ष के बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति Woodrow Wilson ने 9 मई 1914 को एक कानून पारित किया।
इस कानून के तहत हर साल मई के दूसरे रविवार को आधिकारिक तौर पर मदर्स डे मनाने की घोषणा की गई। इसके साथ ही इसे राष्ट्रीय अवकाश का दर्जा भी दिया गया।
मदर्स डे से जुड़े रोचक तथ्य
कार्नेशन फूल का खास महत्व
अन्ना जार्विस ने सफेद कार्नेशन को मां के प्यार का प्रतीक माना था। उनका मानना था कि यह फूल मां के प्रेम की तरह पवित्र और सच्चा होता है।
बाद में जीवित मां के सम्मान में लाल कार्नेशन और दिवंगत मां की याद में सफेद कार्नेशन पहनने की परंपरा शुरू हुई।
खुद अन्ना जार्विस को हुआ अफसोस
समय के साथ मदर्स डे पूरी दुनिया में लोकप्रिय होता गया। कंपनियों ने इसे कार्ड, फूल और गिफ्ट बेचने का बड़ा अवसर बना लिया। अन्ना जार्विस को इस दिन का अत्यधिक व्यावसायीकरण पसंद नहीं था। उनका मानना था कि यह दिन सिर्फ भावनाओं और मां के प्रति सम्मान का होना चाहिए, न कि कारोबार का।
भारत समेत दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है मदर्स डे
आज भारत सहित दुनिया के 40 से ज्यादा देशों में मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। हालांकि कुछ देशों में इसकी तारीख अलग होती है। उदाहरण के लिए ब्रिटेन में यह दिन मार्च में मनाया जाता है। साल 2026 में मदर्स डे 10 मई को मनाया जा रहा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मां का सम्मान सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं है, लेकिन उनके प्रति आभार जताने के लिए यह एक बेहद खास अवसर जरूर है।