राष्ट्रीय ध्वज दिवस 2026: 79 साल पहले आज ही के दिन अपनाया गया था तिरंगा, जानिए इसका इतिहास और महत्व
आज यानी 22 जुलाई को देश राष्ट्रीय ध्वज दिवस (National Flag Day) मना रहा है। इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के वर्तमान स्वरूप को औपचारिक रूप से अपनाया था। इसके महज 24 दिन बाद, 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और तिरंगा देश का आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज बना।
इस वर्ष भारत अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटा है। ऐसे में तिरंगा केवल एक झंडा नहीं, बल्कि देश की आजादी, एकता, संप्रभुता और संवैधानिक मूल्यों का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर देशवासियों को प्रेरित कर रहा है।
पिंगली वेंकैया के डिजाइन पर आधारित है तिरंगा
भारत का राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया द्वारा तैयार किए गए डिजाइन पर आधारित है। इसमें ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग की तीन समान क्षैतिज पट्टियां हैं। सफेद पट्टी के मध्य में 24 तीलियों वाला गहरे नीले रंग का अशोक चक्र बना है।
स्वतंत्रता आंदोलन के साथ विकसित हुआ तिरंगा
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का स्वरूप कई दशकों में विकसित हुआ।
- 1904 में स्वामी विवेकानंद की शिष्या सिस्टर निवेदिता ने प्रारंभिक ध्वज डिजाइन तैयार किया।
- 1906 में स्वदेशी आंदोलन के दौरान कोलकाता में पहला तिरंगा फहराया गया।
- 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टुटगार्ट में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय ध्वज फहराकर दुनिया के सामने भारत की आजादी की आवाज बुलंद की।
- 1917 में एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक ने होमरूल आंदोलन के दौरान नया ध्वज प्रस्तुत किया।
- 1921 में पिंगली वेंकैया ने महात्मा गांधी को ध्वज का डिजाइन दिखाया, जिसमें गांधीजी के सुझाव पर सफेद रंग और चरखा जोड़ा गया।
- 1931 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ बीच में चरखे वाले तिरंगे को अपनाया, जो वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज का आधार बना।
- 22 जुलाई 1947 को मिला राष्ट्रीय ध्वज का दर्जा
स्वतंत्रता से पहले जून 1947 में संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज के लिए एक समिति बनाई। समिति ने 1931 के तिरंगे को बनाए रखने और चरखे की जगह सारनाथ स्थित सम्राट अशोक के सिंह स्तंभ के धर्मचक्र को शामिल करने की सिफारिश की।
22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और वर्तमान तिरंगे को भारत का राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया। अशोक चक्र की 24 तीलियां धर्म, न्याय, प्रगति और निरंतर गतिशीलता का प्रतीक मानी जाती हैं।
तिरंगे के रंगों का क्या है अर्थ?
- केसरिया रंग – साहस, त्याग और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक।
- सफेद रंग – शांति, सत्य और ईमानदारी का संदेश।
- हरा रंग – समृद्धि, विकास और प्रकृति के साथ संतुलन का प्रतीक।
- अशोक चक्र – धर्म, न्याय, सुशासन और निरंतर प्रगति का प्रतीक।
संविधान और कानून में तिरंगे का सम्मान
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(क) के तहत प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है कि वह संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करे।
राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग और सम्मान से जुड़े नियम फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002, राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 तथा एम्ब्लेम्स एंड नेम्स (प्रिवेंशन ऑफ इम्प्रॉपर यूज) एक्ट, 1950 के तहत निर्धारित किए गए हैं।
2022 में बदले गए नियम
वर्ष 2022 में फ्लैग कोड में संशोधन कर नागरिकों को दिन और रात दोनों समय तिरंगा फहराने की अनुमति दी गई। साथ ही केवल खादी ही नहीं, बल्कि पॉलिएस्टर, कॉटन, ऊन, सिल्क और मशीन से बने राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग की भी अनुमति दी गई।
हालांकि तिरंगे को हमेशा सम्मानजनक तरीके से फहराना अनिवार्य है। इसे जमीन या पानी को छूने देना, सजावट या व्यावसायिक उपयोग में लाना या किसी भी तरह उसका अपमान करना कानूनन दंडनीय अपराध है।
'हर घर तिरंगा' अभियान और राष्ट्रीय ध्वज क्विज
आजादी के 80वें वर्ष के अवसर पर केंद्र सरकार 'हर घर तिरंगा' अभियान के जरिए देशवासियों से अपने घरों, कार्यालयों और संस्थानों पर तिरंगा फहराने की अपील कर रही है।
इसके साथ ही युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने MY Bharat Portal पर नेशनल फ्लैग क्विज 2026 भी शुरू की है, ताकि नागरिकों, विशेषकर युवाओं को तिरंगे के इतिहास, महत्व और उससे जुड़े संवैधानिक मूल्यों की जानकारी मिल सके।