जिसने बनाई रणनीति, वही छोड़ गया साथ: संदीप पाठक का जाना AAP के लिए सबसे बड़ा झटका क्यों?
Sandeep Pathak Join BJP: दिल्ली की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय का ऐलान कर दिया। हालांकि पार्टी नेतृत्व को इस तरह की स्थिति का अंदेशा था, राघव चड्ढा का पार्टी को छोड़ना तो एक्सपेक्टेड था लेकिन जिस नाम ने सबसे ज्यादा चौंकाया, वह था संदीप पाठक।
संदीप पाठक का जाना क्यों बना सबसे बड़ा झटका?
AAP के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, संदीप पाठक का पार्टी छोड़ना सबसे अप्रत्याशित रहा। पाठक लंबे समय तक पार्टी के रणनीतिकार के तौर पर काम करते रहे और उन्हें अरविंद केजरीवाल का “चाणक्य” माना जाता था। वह संगठन के बैकएंड ऑपरेशन संभालने, चुनावी रणनीति बनाने और आंकड़ों के आधार पर फैसले लेने के लिए जाने जाते थे।
2025 के बाद क्यों बदली तस्वीर?
सूत्रों के मुताबिक, 2025 के बाद पार्टी के भीतर पाठक की भूमिका कमजोर होने लगी। दिल्ली चुनावों के दौरान उनकी रणनीतियों पर सवाल उठे और संगठन विस्तार को लेकर उनके दावों पर भी पार्टी नेतृत्व संतुष्ट नहीं था। धीरे-धीरे उन्हें अहम फैसलों से दूर कर दिया गया, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ती गई।
राघव चड्ढा के बाद साफ हो गए थे संकेत
राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने और BJP में शामिल होने के बाद यह संकेत मिल गया था कि AAP के भीतर बड़ा राजनीतिक बदलाव हो सकता है। हालांकि माना जा रहा था कि यह घटनाक्रम 2026 के मध्य तक सामने आएगा, लेकिन अप्रैल में ही अचानक यह “राजनीतिक खेल” सामने आ गया।
24 घंटे में कैसे हुआ पूरा खेल?
सूत्रों के अनुसार, BJP में शामिल होने वाले एक सांसद ने 23 अप्रैल तक AAP नेतृत्व के साथ बैठक भी की थी। दिलचस्प बात यह रही कि वही नेता अंदरूनी चर्चाओं में शामिल रहते हुए भी पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे थे। इससे साफ है कि पूरा घटनाक्रम बेहद गोपनीय तरीके से प्लान किया गया था।
ED कार्रवाई और आंतरिक विवाद भी बने कारण
अशोक मित्तल पर ED की कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया था। वहीं स्वाति मालीवाल पहले से ही पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रही थीं। उद्योगपति विक्रमजीत साहनी और अन्य नेताओं के रुख से भी यह साफ हो गया था कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
AAP की रणनीति: अब क्या होगा आगे?
AAP अब अपने राज्यसभा चीफ व्हिप एनडी गुप्ता के जरिए दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई का कितना असर होगा, यह देखना बाकी है। लेकिन इतना तय है कि 30 दिनों के भीतर पार्टी ने अपने प्रमुख रणनीतिकार, संगठन महासचिव और राज्यसभा उपनेता जैसे अहम चेहरे खो दिए हैं।