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इंटरनेट बंद हो जाए तब भी चलेगा ये चैट ऐप! नाम है बिट चैट
 

 

आलेख -अमित श्रीवास्तव 

बिटचैट (BitChat) एक विकेंद्रीकृत (decentralized) और पीयर-टू-पीयर (P2P) मैसेजिंग ऐप है, जो बिना इंटरनेट, सिम कार्ड, फोन नंबर या केंद्रीय सर्वर के केवल ब्लूटूथ (Bluetooth Low Energy) मेश नेटवर्क के माध्यम से काम करता है।

बिटचैट क्या है? (What is BitChat)

बिना इंटरनेट के चैटिंग : यह वाई-फाई या मोबाइल डेटा के बिना आसपास के उपकरणों को आपस में जोड़कर मैसेज भेजता है।

मेश नेटवर्क तकनीक : इसमें हर फोन एक राउटर की तरह काम करता है, जो मैसेज को एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक आगे बढ़ाकर दायरे को बढ़ाता है।

पूरी तरह गोपनीय : इसमें अकाउंट बनाने के लिए किसी नाम, फोन नंबर या ईमेल की जरूरत नहीं होती और मैसेज केवल डिवाइस पर रहकर स्वतः गायब हो जाते हैं।

बिटचैट का इतिहास (History of BitChat) जुलाई 2025 में शुरुआत: ट्विटर (अब X) और ब्लॉक के सह-संस्थापक जैक डोर्सी (Jack Dorsey) ने वीकेंड प्रोजेक्ट के रूप में लो-लेवल नेटवर्क तकनीक का प्रयोग करते हुए जुलाई 2025 में BitChat का विचार रखा और इसे GitHub पर एक एक्सपेरिमेंटल ऐप के रूप में पेश किया।

बीता और ऐप स्टोर रिलीज : शुरुआती कोडिंग के बाद, अगस्त 2025 के अंत तक यह ऐप आईफोन के उपयोगकर्ताओं के लिए एप्पल ऐप स्टोर पर उपलब्ध हो गया।

भारत में विवाद (2026):

जुलाई 2026 में, भारत के साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने सुरक्षा चिंताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे का हवाला देते हुए GitHub को इस ब्लूटूथ-आधारित ऐप को हटाने का निर्देश दिया, जिसे जैक डोर्सी ने सार्वजनिक किया।

बिना इंटरनेट के ब्लूटूथ के जरिए बिटचैट कैसे काम करता है: 

बिटचैट (BitChat) की तकनीकी कार्यप्रणाली इसे आम मैसेजिंग ऐप्स से अलग बनाती है, और यही वजह है कि यह ऐप वर्तमान में सरकार और डिजिटल राइट्स ग्रुप्स के बीच विवाद का मुख्य केंद्र बन गया है।

1. तकनीकी कार्यप्रणाली (How BitChat Works) जैक डोर्सी द्वारा विकसित बिटचैट एक "डुअल-ट्रांसपोर्ट आर्किटेक्चर" (Dual-Transport Architecture) पर काम करता है, जो इसे पूरी तरह इंटरनेट-मुक्त और सेंसरशिप-प्रतिरोधी बनाता है:

ब्लूटूथ मेश नेटवर्क (Bluetooth Mesh Network): यह ऐप ब्लूटूथ लो एनर्जी (BLE) तकनीक का उपयोग करता है। इसमें हर यूजर का फोन एक 'नोड' या मिनी-राउटर बन जाता है। जब आप मैसेज भेजते हैं, तो वह आसपास के फोन्स से 'हॉप' (उछलते) करते हुए आगे बढ़ता है। इस मल्टी-हॉप फीचर के कारण बिना इंटरनेट के भी मैसेज काफी दूर तक (लगभग 300 मीटर के दायरे में) ट्रांसफर हो सकता है।

डेटा कम्प्रेशन (LC4 Algorithm): ब्लूटूथ के जरिए बड़े मैसेज भेजना मुश्किल होता है। इसलिए, बिटचैट मैसेज को छोटे डेटा पैकेट्स में तोड़कर LC4 कम्प्रेशन एल्गोरिदम से बेहद छोटा कर देता है, जिससे डेटा तुरंत ट्रांसमिट हो सके।

नोस्ट्र प्रोटोकॉल (Nostr Protocol): यदि उपयोगकर्ता के क्षेत्र में इंटरनेट वापस आ जाता है, तो यह ऐप बैकअप के रूप में Nostr (एक विकेंद्रीकृत सोशल नेटवर्किंग प्रोटोकॉल) का उपयोग करके संदेशों को वैश्विक स्तर पर भेज सकता है।

अकाउंट-मुक्त गोपनीयता:

ऐप को इस्तेमाल करने के लिए न तो फोन नंबर, न ईमेल और न ही किसी यूजर रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती है। संदेश एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं और सुरक्षा के लिए इसमें अस्थायी चाबियां (Ephemeral Keys) हर 5 से 15 मिनट में बदलती रहती हैं।

2. सुरक्षा और प्रतिबंध विवाद (Security & Ban Controversy)

जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आपस में संवाद करने के लिए बड़े पैमाने पर BitChat App का उपयोग किया।

इसके बाद ही यह विवाद खड़ा हुआ:

सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का पक्ष (MHA & I4C): केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने 23 जुलाई 2026 को माइक्रोसॉफ्ट के स्वामित्व वाले GitHub को नोटिस भेजकर इसके सोर्स कोड रिपॉजिटरी को हटाने का आदेश दिया। 

सरकार की मुख्य चिंताएं ये हैं: 

3. कानूनी ट्रैकिंग असंभव: ऐप में कोई सेंट्रलाइज्ड सर्वर या लॉगिंग न होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां यह पता नहीं लगा सकतीं कि संदेश किसने और किसे भेजा।

4. दुरुपयोग का खतरा: सरकार का मानना है कि इस तकनीक का फायदा देश-विरोधी तत्व, आतंकवादी संगठन और साइबर अपराधी उठा सकते हैं, जिससे देश की संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो सकता है। शटडाउन बाईपास : इंटरनेट शटडाउन के बावजूद इस ऐप के जरिए अवैध सभाओं और हिंसक प्रदर्शनों का समन्वय किया जा सकता है।

5. डेवलपर और डिजिटल अधिकार समूहों का पक्ष

जैक डोर्सी का बयान: जैक डोर्सी ने सरकारी नोटिस की कॉपी X (ट्विटर) पर साझा करते हुए तंज कसा कि "भारत सरकार को बिटचैट जैसी तकनीक पसंद नहीं है और वह इसे बंद करना चाहती है।"

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF): Internet Freedom Foundation (IFF) और अन्य डिजिटल राइट्स समूहों ने सरकार के इस कदम को " अधिनायकवादी और असंवैधानिक" बताया है । उनका तर्क है कि केवल निगरानी न कर पाने के आधार पर किसी ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर या ऐप को प्रतिबंधित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन

इंटरनेट शटडाउन में काम करने वाले अन्य मुख्य ऐप्सबिटचैट की तरह ही दुनिया भर में कई ऐसे ऐप्स हैं जो ब्लूटूथ, वाई-फाई डायरेक्ट (Wi-Fi Direct) या पीयर-टू-पीयर (P2P) तकनीक का उपयोग करके बिना इंटरनेट के काम करते हैं। इनका उपयोग अक्सर प्राकृतिक आपदाओं या विरोध प्रदर्शनों के दौरान किया जाता है:

Bridgefy (ब्रिजफाई):

यह सबसे लोकप्रिय ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप है। यह ब्लूटूथ मेश नेटवर्क का उपयोग करता है और हांगकांग तथा म्यांमार के प्रदर्शनों के दौरान बहुत चर्चा में रहा था। यह लगभग 100 मीटर की रेंज में बिना इंटरनेट चैट की सुविधा देता है।

Briar (ब्रायर): यह मुख्य रूप से पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए बनाया गया एक सुरक्षित ऐप है। इंटरनेट न होने पर यह ब्लूटूथ और वाई-फाई के जरिए संदेश भेजता है, और इंटरनेट होने पर यह टोर (Tor) नेटवर्क का उपयोग करता है ताकि यूजर की लोकेशन और पहचान पूरी तरह गुप्त रहे

Serval Mesh (सर्वल मेश): यह ऐप फोन के वाई-फाई का उपयोग करके एक निजी नेटवर्क बनाता है। इसके जरिए यूजर बिना सेलुलर नेटवर्क (सिम कार्ड) के भी दूसरे मेश यूजर को मुफ्त फोन कॉल कर सकते हैं और फाइलें भेज सकते हैं।

FireChat (फायरचैट): मेश नेटवर्किंग को लोकप्रिय बनाने वाले शुरुआती ऐप्स में से एक। हालांकि अब यह आधिकारिक रूप से सक्रिय नहीं है, लेकिन इसने बिना इंटरनेट के हजारों लोगों को एक साथ जोड़ने की तकनीक की नींव रखी थी।