India-EU FTA: अमेरिका की धमकियों से तंग दुनिया, भारत बना नया भरोसेमंद ट्रेड पार्टनर
ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति से अमेरिका वैश्विक व्यापार में अलग-थलग पड़ता दिख रहा है। यूरोप और कनाडा ने भारत को नया भरोसेमंद साझेदार चुना है। भारत-EU FTA और भारत-कनाडा ऊर्जा समझौते वैश्विक आर्थिक संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत हैं।
India-EU FTA: अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर दशकों से निर्भर रहे देशों के सामने आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे व्हाइट हाउस में बैठे एक अनिश्चित और टकरावपूर्ण नेतृत्व से कैसे निपटें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक कूटनीति और टैरिफ को हथियार बनाने की नीति ने अमेरिका के कई सहयोगियों को असहज कर दिया है।
इसका ताजा जवाब इस सप्ताह यूरोप और कनाडा की ओर से सामने आया, जब दोनों ने अपने निर्यात और आर्थिक संबंधों में विविधता लाने के लिए भारत को एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में चुना।
यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ कहा जा रहा है। यह समझौता ट्रंप की दबाव आधारित व्यापार नीति के लिए एक स्पष्ट झटका माना जा रहा है। यह डील ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका अपने सहयोगियों को टैरिफ और धमकियों के जरिए नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिका की बेचैनी उस समय खुलकर सामने आ गई, जब अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भारत-EU FTA पर निराशा जताई। CNBC को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यूरोप ने अमेरिका के बजाय व्यापार हितों को प्राथमिकता दी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी देश अब एक अप्रत्याशित और दबाव डालने वाले साझेदार पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
भू-राजनीतिक विश्लेषक माइकल कुगेलमैन के अनुसार, “ट्रंप फैक्टर ने वर्षों से अटकी बातचीत को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाई। यह सिर्फ अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने का प्रयास नहीं, बल्कि एक व्यापक और दीर्घकालिक साझेदारी की नींव है।”
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत और EU मिलकर वैश्विक GDP का 25% और दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक-तिहाई प्रतिनिधित्व करते हैं। यह समझौता अगले वर्ष की शुरुआत में औपचारिक रूप से साइन होने की संभावना है।
इससे भारत को टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान उत्पादों के निर्यात में बड़ी बढ़त मिलेगी, जो अमेरिकी 50% टैरिफ से बुरी तरह प्रभावित थे। वहीं EU के 27 देशों के 96.6% निर्यात पर भारत टैरिफ में कटौती या समाप्ति करेगा। भारत के डेयरी और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस डील से बाहर रखा गया है।
यह समझौता दर्शाता है कि वैश्विक शक्तियां अब अमेरिकी व्यापार अस्थिरता से बचने के लिए डी-रिस्किंग कर रही हैं। भारत ने इस मौके का फायदा उठाते हुए ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ भी व्यापार समझौते किए हैं। भारत को अब एक स्थिर और भरोसेमंद वैश्विक ट्रेड पार्टनर के रूप में देखा जा रहा है।
कनाडा भी भारत के साथ
ट्रंप द्वारा बार-बार ऊर्जा आपूर्ति को लेकर धमकियों के बाद कनाडा ने भी अपने विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। अब कनाडा भारत को कच्चा तेल, LNG और LPG की आपूर्ति बढ़ाएगा, जबकि भारत कनाडा को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात करेगा।
यह निर्णय हाल ही में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन के बीच हुई बैठक में लिया गया। कनाडा में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत-कनाडा संबंधों में भी नई शुरुआत देखी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यहां भी ट्रंप की आक्रामक नीति ने कनाडा को भारत के करीब लाने में भूमिका निभाई।