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क्या है टाइम कैप्सूल? अमेरिका 250 साल के लिए करेगा दफन, भारत में इंदिरा गांधी से PM मोदी तक जुड़ा है इतिहास
 

 

अमेरिका अपनी आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विशेष टाइम कैप्सूल तैयार कर उसे 250 वर्षों के लिए सुरक्षित दफनाने की योजना बना रहा है। इस पहल के बाद टाइम कैप्सूल एक बार फिर चर्चा में है। भारत में भी समय-समय पर टाइम कैप्सूल को लेकर कई बड़े फैसले और विवाद सामने आए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल तक टाइम कैप्सूल इतिहास को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।

क्या होता है टाइम कैप्सूल?

टाइम कैप्सूल एक विशेष कंटेनर होता है, जिसमें किसी देश, समाज या संस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तुएं, दस्तावेज, तस्वीरें, संदेश और ऐतिहासिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाते हैं। इसे इस उद्देश्य से जमीन के भीतर या किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है ताकि कई दशकों या सदियों बाद इसे खोलकर उस समय की संस्कृति, तकनीक, समाज और इतिहास को समझा जा सके।

अमेरिका क्यों दफन करेगा टाइम कैप्सूल?

अमेरिका अपनी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक टाइम कैप्सूल तैयार कर रहा है। इसमें मौजूदा दौर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां, दस्तावेज, सांस्कृतिक विरासत और तकनीकी विकास से जुड़ी सामग्री रखी जाएगी। इसे 250 वर्षों तक सुरक्षित रखा जाएगा और निर्धारित समय के बाद खोला जाएगा।

भारत में भी रहा है टाइम कैप्सूल का इतिहास

भारत में पहली बार टाइम कैप्सूल वर्ष 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में चर्चा में आया था। इसे दिल्ली के लाल किले के पास जमीन में दफनाया गया था। हालांकि बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद इसे निकाल लिया गया, जिससे यह राजनीतिक विवाद का विषय बन गया।

इसके बाद भी समय-समय पर विभिन्न परियोजनाओं और ऐतिहासिक अवसरों पर टाइम कैप्सूल का उपयोग किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भी नई संसद भवन सहित कुछ प्रमुख परियोजनाओं में टाइम कैप्सूल को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि कई मामलों में सरकार ने आधिकारिक तौर पर ऐसी खबरों का खंडन भी किया।

इतिहास को भविष्य तक पहुंचाने का माध्यम

विशेषज्ञों के अनुसार, टाइम कैप्सूल केवल वस्तुओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि यह किसी दौर की सोच, उपलब्धियों और सामाजिक परिस्थितियों का दस्तावेज होता है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश महत्वपूर्ण अवसरों पर टाइम कैप्सूल तैयार कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए इतिहास को सुरक्षित रखने की परंपरा निभाते हैं।