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CRPF में पहली बार 140 पुरुष जवानों का नेतृत्व करेंगी महिला अधिकारी, कौन है सिमरन बाला?

 

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की रहने वाली 26 वर्षीय सिमरन बाला इस गणतंत्र दिवस पर देश के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही हैं। सहायक कमांडेंट सिमरन बाला कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनेंगी। यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व की बात है। सिमरन अपने जिले की भी पहली महिला हैं, जिन्होंने अधिकारी रैंक में देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल में जगह बनाई है।

सिमरन बाला ने शुरुआती पढ़ाई के बाद जम्मू के गांधी नगर स्थित सरकारी महिला कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की। उनकी अगुवाई में 140 से अधिक पुरुष जवानों का दस्ता परेड करेगा, जो देश की नारी शक्ति और नेतृत्व क्षमता का सशक्त प्रतीक होगा।

नक्सल मोर्चे से शुरू हुआ सफर

अप्रैल 2025 में सीआरपीएफ में शामिल होने के बाद सिमरन बाला की पहली तैनाती छत्तीसगढ़ की संवेदनशील ‘बस्तरिया’ बटालियन में हुई। यहां उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई और कठिन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव हासिल किया। यूपीएससी द्वारा आयोजित सीएपीएफ परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने गुरुग्राम स्थित सीआरपीएफ अकादमी से कड़ा प्रशिक्षण लिया। ट्रेनिंग के दौरान उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु अधिकारी और जन व्याख्यान जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

पहली बार पुरुष दस्ते की कमान महिला के हाथ

अब तक गणतंत्र दिवस परेड में महिला अधिकारी आमतौर पर महिला टुकड़ियों का ही नेतृत्व करती आई हैं, लेकिन सिमरन बाला इस परंपरा को बदलने जा रही हैं। करीब सवा तीन लाख जवानों वाले सीआरपीएफ की जिम्मेदारी देश के आंतरिक सुरक्षा मोर्चे पर बेहद अहम है। सिमरन की अगुवाई में जब यह दस्ता कर्तव्य पथ पर कदमताल करेगा, तो यह पल पूरे देश के लिए प्रेरणादायक होगा।

परेड में दिखेगा रोमांच और शौर्य

इस बार की गणतंत्र दिवस परेड में रोमांच की भी कोई कमी नहीं होगी। सीआरपीएफ और एसएसबी की महिला ‘डेयर डेविल्स’ की संयुक्त टीम बुलेट मोटरसाइकिल पर हैरतअंगेज करतब दिखाएगी। इसके अलावा सीआईएसएफ का पैदल दस्ता और बैंड, साथ ही बीएसएफ की ऊंट सवार टुकड़ी परेड की शोभा बढ़ाएगी। रायसीना हिल से लाल किले तक निकलने वाली यह परेड भारत की सैन्य ताकत, अनुशासन और सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन होगी।