क्या गाय बनेगी भारत का राष्ट्रीय पशु? अब मुस्लिम पक्ष भी खुलकर आया साथ, देशभर में बहस
भारत में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद अब मुस्लिम संगठनों और मौलाना अरशद मदनी ने भी इस मांग का समर्थन किया है। इस मुद्दे पर राजनीति, कानून और सामाजिक सौहार्द को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
भारत में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग एक बार फिर देशभर में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। अब यह मुद्दा केवल धार्मिक संगठनों या साधु-संतों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मुस्लिम समुदाय के कई बड़े धर्मगुरुओं और संगठनों के समर्थन के बाद इस बहस ने नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या केंद्र सरकार भविष्य में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की दिशा में कोई बड़ा कदम उठाएगी।
अदालतों तक पहुंच चुका है मामला
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पहले भी अदालतों तक पहुंच चुकी है। वर्ष 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा था कि गाय भारतीय संस्कृति और आस्था का अहम हिस्सा है और इसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
इसके पहले वर्ष 2017 में राजस्थान हाईकोर्ट ने भी केंद्र सरकार को इस दिशा में कदम उठाने का सुझाव दिया था। हालांकि कानूनी स्थिति यह है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246(3) के तहत पशु संरक्षण का विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसी वजह से देश के कई राज्यों में गौ-वध पर कड़े कानून लागू हैं, जबकि कुछ राज्यों में इस पर प्रतिबंध नहीं है।
मुस्लिम संगठनों के समर्थन से बदला माहौल
इस पूरे मुद्दे में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सार्वजनिक रूप से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का समर्थन किया।
मौलाना मदनी ने कहा कि देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को माता मानती है, इसलिए उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलता है तो इस मुद्दे पर होने वाली हिंसा, नफरत और राजनीति को खत्म करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी समुदायों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
हामिद अंसारी और सरवर चिश्ती ने भी रखा पक्ष
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़े सैयद सरवर चिश्ती ने भी बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही है। इसके बाद देशभर में इस विषय पर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। मुस्लिम धर्मगुरुओं का यह रुख भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान के बाद यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया। उन्होंने कहा था कि “गाय हमारी माता है” और लोगों को समाज में शांति और सम्मान बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मुद्दे पर लगातार बहस जारी है।
राजनीति में भी तेज हुआ विवाद
कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे सामाजिक सौहार्द बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि विपक्ष सवाल उठा रहा है कि यदि गाय को लेकर इतनी बड़ी भावनात्मक और राजनीतिक चर्चा है तो केंद्र सरकार इस पर स्पष्ट कानून क्यों नहीं ला रही। हालांकि केंद्र सरकार ने संसद में साफ किया है कि फिलहाल गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
क्या संसद लेगी बड़ा फैसला?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में संसद इस दिशा में कोई ऐतिहासिक फैसला लेगी? फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक स्तर पर चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।
हालांकि इस पूरी बहस के बीच सबसे सकारात्मक संदेश आपसी सम्मान और सामाजिक सौहार्द का माना जा रहा है। कई लोग इसे भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक एकता का उदाहरण भी बता रहे हैं। गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलेगा या नहीं, इसका फैसला आने वाले समय में होगा। लेकिन फिलहाल इस मुद्दे ने देशभर में एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।