CBSE का बड़ा बदलाव: कक्षा 6 से दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा अनिवार्य, अगले सत्र से लागू होगी नई लैंग्वेज पॉलिसी
नई दिल्ली। Central Board of Secondary Education (CBSE) ने National Education Policy (NEP 2020) और National Curriculum Framework for School Education (NCFSE 2023) के तहत बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। बोर्ड 2027-28 सत्र से नई ‘थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी 2026’ लागू करेगा। इसके तहत कक्षा 6 से सभी छात्रों के लिए दो भारतीय भाषाओं के साथ एक विदेशी भाषा पढ़ना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
अंग्रेजी को माना जाएगा विदेशी भाषा
नई नीति के अनुसार अंग्रेजी को थर्ड लैंग्वेज यानी विदेशी भाषा की श्रेणी में रखा जाएगा। छात्र दो भारतीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी को विदेशी भाषा के रूप में चुन सकेंगे। वहीं यदि कोई छात्र फ्रेंच, जर्मन या अन्य विदेशी भाषा का चयन करता है, तो उसके साथ भी दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा।
2031 तक बोर्ड परीक्षा में शामिल करने की तैयारी
सीबीएसई कक्षा 6 से यह नियम चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। बोर्ड का लक्ष्य है कि वर्ष 2031 तक इसे कक्षा 10वीं तक पूरी तरह लागू कर दिया जाए। इसके बाद 2031 से थर्ड लैंग्वेज को बोर्ड परीक्षा में भी शामिल करने की योजना है।
नई किताबें तैयार करेगा बोर्ड
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सीबीएसई तीसरी भाषा के लिए नया पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करेगा। पहले चरण में तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, गुजराती और बांग्ला सहित कुल 9 भारतीय भाषाओं की पुस्तकें तैयार की जाएंगी। बाद में अन्य भारतीय और विदेशी भाषाओं के लिए भी पाठ्य सामग्री विकसित की जाएगी।
नई नीति का उद्देश्य छात्रों में बहुभाषिक दक्षता विकसित करना और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है। CBSE का मानना है कि इससे विद्यार्थियों की भाषाई समझ मजबूत होगी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।