IGNOU के इन कोर्स की वैधता पर चर्चा तेज, एडमिशन लेने से पहले जानें नियम
New Delhi : अगर आप इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से पढ़ाई कर रहे हैं या यहां एडमिशन लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। खासकर हेल्थकेयर और साइकोलॉजी जैसे कोर्स करने वाले छात्रों के बीच इन दिनों असमंजस की स्थिति बन गई है। इसकी वजह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों को लेकर उठ रहे सवाल हैं।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, ऐसे कई कोर्स जिनमें प्रैक्टिकल या क्लीनिकल ट्रेनिंग जरूरी होती है, उन्हें डिस्टेंस मोड से करवाने को लेकर बहस शुरू हो गई है। हेल्थकेयर और साइकोलॉजी जैसे विषयों में केवल सैद्धांतिक पढ़ाई पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि प्रैक्टिकल अनुभव भी जरूरी होता है।
लेकिन IGNOU इन कोर्स में एडमिशन दे रहा है, जिससे छात्रों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आगे चलकर उनकी डिग्री मान्य होगी या नहीं।
साइकोलॉजी कोर्स पर ज्यादा चर्चा
इस साल IGNOU ने MA Psychology कोर्स में बड़ी संख्या में आवेदन आमंत्रित किए हैं और कई छात्रों ने इसमें दाखिला भी ले लिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि साइकोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए क्लीनिकल ट्रेनिंग और प्रैक्टिस बेहद जरूरी होती है। यदि छात्रों को यह ट्रेनिंग पर्याप्त रूप से नहीं मिलती, तो आगे नौकरी या प्रोफेशनल लाइसेंस लेने में दिक्कत आ सकती है।
UGC के नियम क्या कहते हैं
UGC के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जिन कोर्स में प्रैक्टिकल या क्लीनिकल ट्रेनिंग अनिवार्य होती है, उन्हें आमतौर पर रेगुलर मोड में कराया जाना चाहिए। ऐसे कोर्स को पूरी तरह ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड में कराना उचित नहीं माना जाता। इसी वजह से अब इन कोर्स की वैधता और भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है।
NET और JRF पर पड़ सकता है असर
जो छात्र आगे चलकर UGC NET या JRF की तैयारी करना चाहते हैं, उनके लिए यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो जाता है। इन परीक्षाओं में बैठने के लिए डिग्री का मान्य होना जरूरी है। अगर किसी कोर्स की मान्यता पर सवाल खड़े होते हैं, तो छात्रों को NET या JRF के लिए आवेदन करने में दिक्कत आ सकती है, जिससे उनका टीचिंग या रिसर्च का सपना प्रभावित हो सकता है।
छात्रों में बढ़ी चिंता
इस पूरे मामले के बाद छात्रों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। जो छात्र पहले से पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें अपने समय और पैसे को लेकर चिंता हो रही है। वहीं, जो नए छात्र एडमिशन लेने की सोच रहे हैं, वे अब ज्यादा सावधानी से फैसला लेना चाहते हैं।
IGNOU का पक्ष
IGNOU अपने प्रॉस्पेक्टस में कोर्स से जुड़ी शर्तों और जरूरी जानकारी देता है। हालांकि कई बार छात्र इन बातों पर पूरी तरह ध्यान नहीं देते या सही जानकारी हासिल नहीं कर पाते। इसी वजह से बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।