गलत छपे नोटों का क्या होता है? जानिए RBI की प्रक्रिया और स्टार मार्क वाले नोटों का सच
Mumbai : क्या आपने कभी सोचा है कि नोटों की छपाई के दौरान अगर कोई गलती हो जाए तो उन नोटों का क्या होता है? अक्सर सोशल मीडिया पर गलत छपे हुए नोटों की तस्वीरें वायरल होती रहती हैं, जिन्हें देखकर लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं। क्या ऐसे नोट बाजार में चल सकते हैं? क्या उनकी कोई विशेष कीमत होती है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया।
भारत में नोटों की छपाई अत्याधुनिक तकनीक और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत की जाती है। नोट तैयार होने के प्रत्येक चरण में उनकी गुणवत्ता की जांच की जाती है ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि वाले नोट आम लोगों तक न पहुंच सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार, नोटों पर सीरियल नंबर छापने से पहले और बाद में कई स्तरों पर निरीक्षण किया जाता है। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाता है कि नोट का रंग, डिजाइन, आकार, सुरक्षा फीचर और नंबरिंग पूरी तरह सही हो। यदि किसी नोट में प्रिंटिंग धुंधली हो, डिजाइन टेढ़ा-मेढ़ा हो, कटिंग में गड़बड़ी हो या कोई अन्य तकनीकी दोष हो, तो उसे तुरंत अलग कर दिया जाता है।
बाजार में नहीं पहुंचते त्रुटिपूर्ण नोट
गलत या दोषपूर्ण नोटों को कभी भी बाजार में जारी नहीं किया जाता। ऐसे नोटों को सुरक्षित प्रक्रिया के तहत नष्ट कर दिया जाता है। आमतौर पर इन्हें विशेष मशीनों से काटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल दिया जाता है या अन्य सुरक्षित तरीकों से नष्ट किया जाता है, ताकि उनका किसी भी प्रकार से दुरुपयोग न हो सके।
क्या होती है स्टार सीरीज?
नोटों की छपाई से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू 'स्टार सीरीज' नोट भी है। जब किसी नोटों के बंडल में कोई खराब नोट पाया जाता है और उसे हटाया जाता है, तो उसकी जगह एक नया नोट लगाया जाता है। इस नए नोट के सीरियल नंबर में एक स्टार (*) का निशान होता है।
इसी वजह से इन्हें स्टार सीरीज नोट कहा जाता है। कई लोग स्टार मार्क देखकर इसे विशेष या नकली नोट समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।
पूरी तरह वैध होते हैं स्टार मार्क वाले नोट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, स्टार मार्क वाले नोट पूरी तरह असली और वैध होते हैं। इनका उपयोग सामान्य नोटों की तरह ही किया जा सकता है। स्टार चिन्ह केवल यह दर्शाता है कि संबंधित नोट को किसी खराब या दोषपूर्ण नोट के स्थान पर जारी किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नोट छपाई की कड़ी निगरानी और गुणवत्ता जांच के कारण त्रुटिपूर्ण नोटों के आम जनता तक पहुंचने की संभावना बेहद कम होती है। यदि कभी कोई ऐसा नोट दिखाई देता है, तो उसकी जांच संबंधित बैंक या आरबीआई के माध्यम से कराई जा सकती है।