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आग लगने पर कौन जिम्मेदार? होटल, स्कूल, अस्पताल और कोचिंग सेंटर में कौन-कौन से सुरक्षा नियम हैं अनिवार्य?

लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड के बाद वाराणसी में फायर विभाग ने बड़े पैमाने पर कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू की। नौ कोचिंग सेंटरों के निरीक्षण में पांच जगह गंभीर खामियां मिलीं। कई संस्थानों में फायर सेफ्टी उपकरण तो मौजूद थे, लेकिन उन्हें संचालित करने वाले कर्मचारी प्रशिक्षित नहीं पाए गए।

 

Fire Safety Guidelines India: लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर देशभर में भवनों की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के महीनों में दिल्ली, लखनऊ और अन्य शहरों में सामने आए अग्निकांडों ने यह चिंता बढ़ा दी है कि आखिर सार्वजनिक भवनों, कोचिंग सेंटरों, स्कूलों, अस्पतालों और होटलों में सुरक्षा मानकों का कितना पालन हो रहा है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि फायर सेफ्टी नियम क्या हैं, फायर NOC क्यों जरूरी है और किसी भवन के लिए कौन-कौन से सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य होते हैं।

क्या है फायर सेफ्टी एक्ट और इसका उद्देश्य?

देश के अलग अलग राज्यों में अग्नि सुरक्षा को लेकर अलग-अलग कानून लागू हैं। उत्तर प्रदेश में भवनों और सार्वजनिक परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश फायर प्रिवेंशन एंड फायर सेफ्टी एक्ट, 2005 लागू है। इस कानून का उद्देश्य आग लगने की घटनाओं को रोकना, लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बड़े हादसों में जान-माल के नुकसान को कम करना है।

यह कानून अस्पतालों, होटल, मॉल, स्कूल, कोचिंग सेंटर, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला भवनों समेत उन सभी परिसरों पर लागू होता है जहां बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं।

फायर NOC क्या होती है?

फायर NOC यानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट फायर विभाग द्वारा जारी किया जाने वाला प्रमाणपत्र है। यह प्रमाणित करता है कि संबंधित भवन में आग से बचाव के लिए आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है।

बहुमंजिला इमारतों, बड़े होटल, अस्पताल, मॉल, स्कूल, कोचिंग संस्थान और अन्य सार्वजनिक भवनों को संचालन शुरू करने से पहले फायर विभाग से NOC प्राप्त करनी होती है। बिना NOC के ऐसे भवनों का संचालन नियमों के विरुद्ध माना जा सकता है।

किन सुरक्षा इंतजामों का होना जरूरी है?

फायर सेफ्टी नियमों के अनुसार भवनों में पर्याप्त संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर सिस्टम और आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की व्यवस्था अनिवार्य होती है।

किसी भी अग्निकांड में शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि भवन में आग का अलार्म समय पर बज जाए और लोगों के बाहर निकलने के लिए सुरक्षित रास्ते उपलब्ध हों, तो बड़ी जनहानि को रोका जा सकता है।

ऊंची इमारतों के लिए अलग सुरक्षा मानक

बहुमंजिला भवनों में केवल फायर एक्सटिंग्विशर पर्याप्त नहीं माने जाते। ऐसे भवनों में फायर लिफ्ट, पर्याप्त जल भंडारण, हाइड्रेंट सिस्टम और बैकअप पावर व्यवस्था भी जरूरी होती है ताकि आपात स्थिति में सुरक्षा उपकरण लगातार काम करते रहें।

इसके अलावा विद्युत वायरिंग, जनरेटर और गैस पाइपलाइन की समय-समय पर जांच भी अनिवार्य मानी जाती है, क्योंकि अधिकांश अग्निकांड शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबियों के कारण होते हैं।

भवन मालिक और संचालक की क्या जिम्मेदारी होती है?

फायर सेफ्टी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भवन मालिक, संस्थान संचालक और प्रबंधन की होती है। केवल NOC प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षा उपकरणों का नियमित रखरखाव और समय-समय पर परीक्षण भी जरूरी है।

कई मामलों में भवनों में फायर सेफ्टी उपकरण तो लगे होते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे काम नहीं करते। ऐसी स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह जाती है।

नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

फायर विभाग को किसी भी सार्वजनिक भवन का निरीक्षण करने का अधिकार होता है। यदि जांच के दौरान सुरक्षा मानकों में कमी पाई जाती है, तो विभाग नोटिस जारी कर सकता है।

गंभीर मामलों में जुर्माना लगाया जा सकता है, फायर NOC निरस्त की जा सकती है और संबंधित संस्थान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर भवन को सील करने जैसी कार्रवाई भी संभव है।

क्यों बढ़ रही हैं अग्निकांड की घटनाएं?

कई हादसों के पीछे फायर NOC का अभाव, आपातकालीन निकास की कमी, अवैध निर्माण, खराब विद्युत वायरिंग और सुरक्षा उपकरणों का सही रखरखाव न होना प्रमुख कारण हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच कई इमारतों में क्षमता से अधिक लोगों का उपयोग भी अग्निकांड के दौरान खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, जीवन रक्षा का कवच

फायर सेफ्टी को अक्सर केवल एक सरकारी औपचारिकता समझ लिया जाता है, जबकि विशेषज्ञ इसे जीवन रक्षा का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच मानते हैं। एक सही तरीके से तैयार भवन, कार्यरत सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ किसी भी बड़े हादसे में सैकड़ों लोगों की जान बचा सकते हैं।

लखनऊ अग्निकांड जैसे हादसे यह याद दिलाते हैं कि फायर सेफ्टी नियम केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर लागू होने चाहिए। क्योंकि सुरक्षा में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।