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आखिर क्यों कहा जा रहा है iPhone को ‘बर्थ कंट्रोल डिवाइस’? स्मार्टफोन के बाद क्यों तेजी से गिरने लगी बर्थ रेट, रिसर्च में चौंकाने वाले खुलासा

क्या iPhone और स्मार्टफोन ने दुनिया भर में जन्म दर घटाने में बड़ी भूमिका निभाई है? नई रिसर्च में दावा किया गया है कि 2007 के बाद स्मार्टफोन के प्रसार से प्रजनन दर में तेज गिरावट आई। जानिए शोध के निष्कर्ष, विशेषज्ञों की राय और इसके सामाजिक प्रभाव।

 

क्या स्मार्टफोन, खासकर iPhone, दुनिया भर में घटती जन्म दर के पीछे एक बड़ा कारण बन रहा है? एक नई रिसर्च और उससे जुड़ी वैश्विक बहस ने इस सवाल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि 2007 में iPhone के लॉन्च के बाद जिस तरह स्मार्टफोन आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बने, उसी अवधि में कई देशों में प्रजनन दर (Fertility Rate) में असामान्य गिरावट दर्ज की गई।

यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञ अब iPhone को मजाकिया लेकिन गंभीर संदर्भ में “लगभग एक बर्थ कंट्रोल डिवाइस” तक कह रहे हैं।

2007 के बाद अचानक क्यों बदली तस्वीर?

अमेरिका में प्रकाशित हालिया शोध पत्रों के अनुसार 2007 के बाद जन्म दर में आई गिरावट को केवल आर्थिक संकट, महंगाई, महंगे मकान, महंगी शिक्षा या गर्भनिरोधक साधनों के बढ़ते उपयोग से पूरी तरह नहीं समझाया जा सकता। शोधकर्ताओं ने स्मार्टफोन के प्रसार और जन्म दर में गिरावट के बीच एक मजबूत संबंध पाया है।

रिसर्च के मुताबिक iPhone और आधुनिक स्मार्टफोन के प्रसार ने युवाओं की जीवनशैली, सामाजिक व्यवहार और रिश्तों के स्वरूप को बदल दिया। इसका असर डेटिंग, आमने-सामने की मुलाकातों और यौन संबंधों पर भी पड़ा।

रिसर्च में क्या दावा किया गया?

एक अमेरिकी अध्ययन में दावा किया गया है कि iPhone के प्रसार ने 2007 के बाद अमेरिका में प्रजनन दर में आई गिरावट के 33 से 52 प्रतिशत हिस्से तक को प्रभावित किया हो सकता है। शोधकर्ताओं ने AT&T नेटवर्क कवरेज और शुरुआती iPhone उपलब्धता के आधार पर यह विश्लेषण किया।

शोध के अनुसार, 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग में जन्म दर में 4.5% से 8% तक गिरावट देखी गई। 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई। स्मार्टफोन के प्रसार के बाद युवाओं के बीच आमने-सामने मिलने का समय कम हुआ।

ऑनलाइन मनोरंजन, सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट की खपत तेजी से बढ़ी।

कैसे असर डाल रहे हैं स्मार्टफोन?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रभाव जैविक नहीं बल्कि सामाजिक है। स्मार्टफोन आने के बाद युवाओं का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म, गेमिंग और डिजिटल मनोरंजन में अधिक समय बिताने लगा। इसके कारण वास्तविक सामाजिक संपर्क कम हुए, दोस्ती और रिश्तों के पारंपरिक तरीके बदले और कई मामलों में डेटिंग तथा विवाह की उम्र भी आगे खिसक गई।

कुछ अध्ययनों में यह भी कहा गया कि स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग ने अकेलेपन, सामाजिक दूरी और रिश्तों से जुड़ी अपेक्षाओं को प्रभावित किया है।

क्या केवल स्मार्टफोन ही जिम्मेदार हैं?

नहीं। अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि जन्म दर में गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।

इनमें शामिल हैं- महंगी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं, आवास की बढ़ती लागत, विवाह में देरी, महिलाओं की बढ़ती शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता, बदलती सामाजिक प्राथमिकताएं, डिजिटल जीवनशैली और सोशल मीडिया का प्रभाव। हालांकि कई शोधकर्ता मानते हैं कि स्मार्टफोन ने इन पहले से मौजूद रुझानों को और तेज कर दिया।

दुनिया भर में गिर रही है जन्म दर

वैश्विक स्तर पर भी जन्म दर लगातार नीचे आ रही है। कई देशों की प्रजनन दर अब रिप्लेसमेंट लेवल (2.1 बच्चे प्रति महिला) से नीचे पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के दो-तिहाई से अधिक देशों में यह स्थिति बन चुकी है। भारत में भी हाल के वर्षों में कुल प्रजनन दर 1.9 तक पहुंचने की चर्चा रही है, जो रिप्लेसमेंट लेवल से कम है।


कुछ विशेषज्ञ स्मार्टफोन को जन्म दर में गिरावट का महत्वपूर्ण कारक मानते हैं, जबकि अन्य इसे केवल एक सहायक कारण बताते हैं।  उनका कहना है कि स्मार्टफोन ने सामाजिक व्यवहार को बदला जरूर है, लेकिन जन्म दर में गिरावट को केवल एक डिवाइस से जोड़ना सही नहीं होगा। आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

क्या सचमुच iPhone ‘बर्थ कंट्रोल डिवाइस’ है?

रिसर्च में ऐसा कोई दावा नहीं किया गया कि iPhone सीधे तौर पर जन्म दर कम करता है। लेकिन कई अध्ययनों ने संकेत दिया है कि स्मार्टफोन और डिजिटल जीवनशैली ने युवाओं के रिश्तों, सामाजिक संपर्क और पारिवारिक निर्णयों को प्रभावित किया है, जिसका असर जन्म दर पर दिखाई दे रहा है।

यही कारण है कि यह बहस तेजी से चर्चा में है कि आधुनिक तकनीक ने केवल संचार का तरीका ही नहीं बदला, बल्कि समाज की जनसांख्यिकीय संरचना पर भी गहरा प्रभाव डाला है।

डिस्क्लेमर: यह लेख विभिन्न शोधों और प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। स्मार्टफोन और जन्म दर के बीच संबंध पर अभी भी अकादमिक बहस जारी है और इसे अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं माना गया है।