सिनेमाघरों में रिलीज हुई 'हनुमान अंश', बड़े पर्दे पर जीवंत हुई नीब करौरी बाबा की प्रेरक आध्यात्मिक गाथा
मुंबई। संत नीब करौरी बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक दर्शन से प्रेरित फिल्म 'हनुमान अंश' शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। यह फिल्म बाबा के बचपन से लेकर मानव सेवा, करुणा और ईश्वर की खोज तक की आध्यात्मिक यात्रा को भावनात्मक अंदाज में प्रस्तुत करती है। इससे पहले मई में नीब करौरी बाबा पर आधारित फिल्म 'श्री बाबा नीब करौरी महाराज' भी रिलीज हुई थी।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की शुरुआत भोसले (चंदन आनंद) से होती है, जो अपने पोते को नीब करौरी बाबा से जुड़ा एक प्रसंग सुनाते हैं। कहानी 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में पहुंचती है, जब बाबा एक क्रांतिकारी की पुलिस से रक्षा करते हैं। इसके बाद कथा 12 वर्षीय बालक लक्ष्मी नारायण की आध्यात्मिक यात्रा पर केंद्रित हो जाती है।
मां की मृत्यु से आहत लक्ष्मी नारायण ईश्वर की खोज में घर छोड़ देता है। मंदिरों, जंगलों, नदियों और गांवों से गुजरते हुए उसकी तलाश धीरे-धीरे मानव सेवा, करुणा और निस्वार्थ प्रेम के मार्ग में बदल जाती है। फिल्म में बाबा से जुड़े कई प्रसिद्ध प्रसंगों और आध्यात्मिक अनुभवों को भी प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले
फिल्म के लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने नीब करौरी बाबा के जीवन पर गहन शोध के बाद इस कहानी को पर्दे पर उतारा है। उन्होंने बताया कि शोध के दौरान गांव के लोगों ने बाबा को "हनुमान का अंश" बताया था, जिससे फिल्म के शीर्षक 'हनुमान अंश' की प्रेरणा मिली।
स्क्रीनप्ले में बाबा के जीवन से जुड़े कई चर्चित प्रसंग—जैसे पशु-पक्षियों से उनका लगाव, अंग्रेज अफसर द्वारा ट्रेन से उतारे जाने की घटना और बाद में उससे माफी मांगने का प्रसंग—भावनात्मक तरीके से पिरोए गए हैं।
गीत-संगीत और अभिनय
फिल्म का भक्तिमय संगीत इसकी आध्यात्मिक भावना को और गहराई देता है। यह केवल चमत्कारों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दुख से अध्यात्म और अध्यात्म से मानव सेवा तक की यात्रा को प्रमुखता से दिखाती है।
नीब करौरी बाबा की भूमिका में शोभिनव डब्ल्यू. सत्या ने प्रभावशाली अभिनय किया है। युवा बाबा के किरदार में विहान एस. हेगड़े ने भी अपनी छाप छोड़ी है। वहीं पूर्णिमा तिवारी और अनिल तिवारी ने अपने सीमित लेकिन दमदार अभिनय से कहानी को मजबूती दी है।
कुछ कमियां भी हैं
फिल्म की गति कुछ स्थानों पर धीमी पड़ती है और बाबा की ख्याति के विस्तार को विस्तार से नहीं दिखाया गया है। हालांकि, ये कमियां फिल्म के भावनात्मक और आध्यात्मिक प्रभाव को ज्यादा प्रभावित नहीं करतीं।
कुल मिलाकर
'हनुमान अंश' नीब करौरी बाबा के जीवन, उनके विचारों और मानव सेवा के संदेश को बड़े पर्दे पर संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करने का सराहनीय प्रयास है। जो दर्शक बाबा के व्यक्तित्व और आध्यात्मिक दर्शन को करीब से समझना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म एक भावनात्मक और प्रेरणादायक अनुभव साबित हो सकती है।