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Oscar 2027 की रेस में ‘धुरंधर’ और ‘हनुमान अंश’ को पछाड़ आगे निकली नागालैंड की ‘Angh’! जानिए क्या है फिल्म की कहानी?

 

भारतीय सिनेमा के लिए यह साल खास उपलब्धियों से भरा रहा है। जहां एक ओर ‘धुरंधर’ और ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों ने दर्शकों के बीच खूब चर्चा बटोरी, वहीं अब नागालैंड की फिल्म ‘अंग’ (Angh) ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। नागा फिल्ममेकर तेजा रियो के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म प्राइज अपने नाम किया है। इस उपलब्धि के साथ फिल्म ने 2027 के ऑस्कर की राह भी पकड़ ली है।


TIFF में मिला प्लेटफॉर्म प्राइज

TIFF के प्लेटफॉर्म प्राइज के लिए चुनी गई ‘अंग’ ने अपनी कहानी और प्रस्तुति से जूरी का ध्यान खींचा। पुरस्कार की घोषणा करते हुए जूरी ने फिल्म के नए नजरिए, मजबूत फिल्म निर्माण और एक ऐसी दुनिया की गहरी और प्रभावशाली तस्वीर पेश करने के लिए इसकी सराहना की, जिसे बड़े पर्दे पर बहुत कम दिखाया गया है। जूरी ने फिल्ममेकर की सोच, साहस और रचनात्मक दृष्टि की भी तारीफ की।


ऑस्कर 2027 से कैसे जुड़ा है ‘अंग’ का नाम?

इस साल से TIFF का प्लेटफॉर्म प्राइज उन अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल पुरस्कारों में शामिल हो गया है, जिनके जरिए विजेता फिल्म को ऑस्कर के लिए सीधे क्वालिफिकेशन का रास्ता मिलता है। ऐसे में ‘अंग’ अब 2027 के ऑस्कर की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी की रेस में शामिल हो गई है। हालांकि, ऑस्कर में भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुनी गई ‘गोंधल’ समेत अन्य राष्ट्रीय एंट्रीज भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगी। अंतिम नॉमिनेशन तक पहुंचने के लिए फिल्मों को एकेडमी के निर्धारित चयन और मतदान प्रक्रिया से गुजरना होगा।


क्या है ‘अंग’ की कहानी?

‘अंग’ की कहानी नागालैंड की पृष्ठभूमि में बुनी गई है और इसके केंद्र में एक पिता और उसके बेटे का रिश्ता है। फिल्म में बेटा मिशन से जुड़ी आधुनिक सुख-सुविधाओं की ओर आकर्षित होता है। इसी के साथ कहानी धर्मांतरण की उस प्रक्रिया को भी सामने लाती है, जिसमें स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को पिछड़ा बताकर उनसे दूरी बनाने का दबाव दिखाई देता है।

फिल्म की खासियत यह भी है कि इसमें नागालैंड की ऐसी संस्कृति और सामाजिक परिवेश को पर्दे पर उतारा गया है, जिसे मुख्यधारा के सिनेमा में बहुत कम जगह मिली है।

1960 के दशक की पृष्ठभूमि, कोन्याक भाषा में फिल्म

तेजा रियो की ‘अंग’ उनकी 2021 में पुरस्कार जीत चुकी शॉर्ट फिल्म पर आधारित है। फिल्म की कहानी 1960 के दशक में स्थापित की गई है और इसे लगभग पूरी तरह कोन्याक भाषा में फिल्माया गया है। स्थानीय भाषा, संस्कृति और वहां के सामाजिक बदलावों को कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है।

‘अंग’ की TIFF में जीत सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की उस विविधता को भी सामने लाती है, जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों की कहानियां अब वैश्विक दर्शकों तक पहुंच रही हैं।