RBI का बड़ा बदलाव: EMI, SIP और बिल पेमेंट अब पहले से आसान और स्मार्ट
RBI ने ऑटो-डेबिट नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब कार्ड बदलने पर ई-मैंडेट अपने आप ट्रांसफर हो जाएंगे और बार-बार OTP की जरूरत नहीं होगी। प्री-डेबिट अलर्ट अनिवार्य होगा और 1 लाख तक के भुगतान आसान होंगे। जानिए नए नियमों का पूरा असर।
Auto Payment में बड़ा बदलाव, यूजर्स को मिलेगी राहत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऑटोमैटिक पेमेंट सिस्टम को लेकर बड़े बदलाव किए हैं, जिससे अब क्रेडिट कार्ड बिल, बीमा प्रीमियम, SIP और OTT सब्सक्रिप्शन जैसे भुगतान पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएंगे। नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब अगर ग्राहक अपना डेबिट या क्रेडिट कार्ड बदलता है, तो उससे जुड़े सभी ई-मैंडेट अपने आप नए कार्ड में ट्रांसफर हो जाएंगे। यानी बार-बार सेटिंग करने की जरूरत खत्म हो जाएगी।
अब कार्ड बदलने पर दोबारा सेटअप की जरूरत नहीं
अब तक की व्यवस्था में जैसे ही कोई कार्ड एक्सपायर होता था या बदला जाता था, यूजर्स को हर ऑटो-पेमेंट के लिए फिर से ई-मैंडेट सेट करना पड़ता था। लेकिन नए नियमों के तहत यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटिक हो जाएगी। इससे समय की बचत होगी और बार-बार होने वाली तकनीकी परेशानियों से छुटकारा मिलेगा।
OTP सिर्फ पहली बार, उसके बाद सब ऑटो
RBI के नए नियमों के अनुसार, अब यूजर्स को केवल पहली बार ई-मैंडेट रजिस्ट्रेशन के दौरान ही OTP (AFA) देना होगा। इसके बाद भविष्य में होने वाले भुगतान के लिए बार-बार OTP डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पेमेंट प्रोसेस तेज और आसान हो जाएगा।
पैसा कटने से पहले अब अलर्ट जरूरी
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए RBI ने प्री-डेबिट नोटिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। अब बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को हर ट्रांजैक्शन से कम से कम 24 घंटे पहले SMS या ईमेल के जरिए जानकारी देनी होगी, जिसमें भुगतान की राशि, तारीख और मर्चेंट का नाम शामिल होगा।
यूजर्स को मिलेगा पूरा कंट्रोल
नए नियमों के तहत ग्राहकों को अपने ई-मैंडेट पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। अब यूजर किसी भी समय अपने ऑटो-पेमेंट को रोक सकते हैं, संशोधित कर सकते हैं या पूरी तरह से कैंसल भी कर सकते हैं। पहले इसके लिए बिलिंग साइकिल का इंतजार करना पड़ता था।
1 लाख तक के पेमेंट होंगे आसान
RBI ने ऑटो-डेबिट लिमिट को भी बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक कर दिया है। इसका मतलब है कि अब बीमा प्रीमियम, म्यूचुअल फंड SIP, EMI और बड़े बिल भुगतान बिना बार-बार OTP के आसानी से हो सकेंगे।
फ्रॉड पर ‘जीरो लायबिलिटी’ का फायदा
अगर किसी ग्राहक के साथ बिना OTP या पासवर्ड शेयर किए धोखाधड़ी होती है और वह समय पर इसकी सूचना देता है, तो उसकी जिम्मेदारी नहीं होगी। इस स्थिति में बैंक को नुकसान उठाना पड़ेगा, जिससे ग्राहकों की सुरक्षा और भरोसा दोनों बढ़ेंगे।