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कर्ज के दलदल में फंस रहे लोग! EMI भरने के लिए लेना पड़ रहा नया लोन, सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा

NEET-UG 2026 विवाद और छात्रों के देशव्यापी प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने युवाओं का सम्मान, परीक्षा सुधार और राष्ट्रहित को सर्वोच्च बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंपने की जानकारी दी।
 

EMI Debt Trap: आसान लोन और बढ़ती EMI अब लाखों परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक परेशानी बनती जा रही है। एक नए सर्वे में सामने आया है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे 40 प्रतिशत लोग पुरानी EMI चुकाने के लिए नया लोन या क्रेडिट कार्ड का सहारा ले रहे हैं। वहीं, 60 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय का लगभग पूरा हिस्सा सिर्फ EMI भरने में खर्च हो रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह स्थिति लोगों को धीरे-धीरे कर्ज के ऐसे चक्र में धकेल रही है, जहां से बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है।

सर्वे में क्या सामने आया?

डेट रिजॉल्यूशन प्लेटफॉर्म Expert Panel की ओर से किए गए सर्वे में आर्थिक रूप से परेशान उधारकर्ताओं की स्थिति का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 60 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनकी मासिक EMI उनके परिवार की कुल आय के बराबर या उससे भी अधिक हो चुकी है। वहीं 40 प्रतिशत लोग पुराने कर्ज की किस्त भरने के लिए नया लोन लेने या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं।

किन वजहों से बढ़ रहा है कर्ज?

रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर लोगों ने शौक पूरे करने के लिए नहीं, बल्कि मजबूरी में कर्ज लिया। सर्वे में सामने आया कि- 

  • 26% लोगों ने मेडिकल इमरजेंसी के कारण लोन लिया।
  • 22% ने शादी, शिक्षा और पारिवारिक जरूरतों के लिए उधार लिया।
  • 18% लोगों ने नौकरी या कारोबार में आई परेशानी के चलते कर्ज लिया।
  • 15% लोगों ने रोजमर्रा के घरेलू खर्च पूरे करने के लिए लोन लिया।


EMI चुकाने में सबसे बड़ी मुश्किल क्या?

सर्वे में शामिल लोगों ने बताया कि नौकरी छूटना, वेतन में कमी और आय घटने के कारण किस्तें समय पर भरना मुश्किल हो गया है। करीब एक-तिहाई लोगों ने इसे सबसे बड़ा कारण बताया। वहीं 28 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी आय की तुलना में EMI का बोझ बहुत ज्यादा हो चुका है। कई लोगों ने एक साथ कई लोन लेने को भी परेशानी की बड़ी वजह बताया।

कई लोग न्यूनतम भुगतान तक सीमित

रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक संकट झेल रहे करीब 60 प्रतिशत लोग या तो केवल न्यूनतम EMI जमा कर पा रहे हैं या फिर किस्तें रोक चुके हैं। हर पांच में से एक व्यक्ति को बैंक या वित्तीय संस्थानों की ओर से कानूनी नोटिस भी मिल चुका है।

रिकवरी एजेंटों के दबाव ने बढ़ाई परेशानी

सिर्फ आर्थिक बोझ ही नहीं, बल्कि रिकवरी एजेंटों का दबाव भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। सर्वे में 35 प्रतिशत लोगों ने किसी न किसी प्रकार की प्रताड़ना की बात कही, जबकि 17 प्रतिशत लोगों ने धमकी, अभद्र भाषा और घर जाकर दबाव बनाने जैसी गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं।

एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

Expert Panel के निदेशक अनुराग मेहरा का कहना है कि भारत की कर्ज समस्या अब सिर्फ EMI चूकने तक सीमित नहीं रही। मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी जाने और अचानक आई आर्थिक मुश्किलों के कारण सामान्य परिवार भी कर्ज के जाल में फंस रहे हैं। उनका मानना है कि उधारकर्ताओं के लिए बेहतर डेट रिजॉल्यूशन सिस्टम और जिम्मेदार रिकवरी व्यवस्था की जरूरत है, ताकि आर्थिक संकट झेल रहे लोगों को राहत मिल सके।