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नेपाल में कुदरत का कहर: फ्लैश फ्लड में 162 की मौत, 400 लापता, 133 भारतीय भी शामिल

 

काठमांडू। नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। हादसे में अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 400 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय पर्यटक और 37 एनआरआई शामिल हैं। इनमें से कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते गए थे। राहत और बचाव अभियान के बीच लापता भारतीयों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।

पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की बात

आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत की और हादसे पर गहरी संवेदना जताई। पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के साथ खड़ा है और हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। भारत की ओर से राहत सामग्री भेजने की तैयारी की जा रही है। भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है, जबकि एनडीआरएफ की टीमों को भी तैनात करने की तैयारी है। नेपाल ने भारत की मदद और प्रधानमंत्री मोदी की संवेदना के लिए आभार जताया है।

भारतीयों के लिए हेल्पलाइन सक्रिय

नेपाल में फंसे भारतीयों की जानकारी जुटाने और उनके परिजनों तक जरूरी सूचना पहुंचाने के लिए अलग-अलग स्तर पर हेल्पलाइन सक्रिय की गई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1070 हेल्पलाइन को सक्रिय किया है। वहीं, चीन स्थित भारतीय दूतावास ने तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने भी राज्य के पर्यटकों की जानकारी जुटाने के लिए डेटा लिंक शुरू किया है, ताकि प्रभावित लोगों का पता लगाया जा सके।

केदारनाथ त्रासदी की याद हुई ताजा

नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा ने साल 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में आई विनाशकारी जलप्रलय की यादें ताजा कर दी हैं। लगातार बारिश और बाढ़ के कारण नेपाल के साथ-साथ भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी चिंता बढ़ गई है। नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। दोनों राज्यों में प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और संभावित स्थिति से निपटने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों का पता लगाना और प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना है। भारतीय और नेपाली एजेंसियां मिलकर राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं।