80 साल की उम्र में चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बनेंगे लूला, फ्लावियो बोल्सोनारो को कितने वोटों से हराया?
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में 80 वर्षीय लूला दा सिल्वा ने फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया। 99.97 प्रतिशत वोटों की गिनती में लूला को 51.76 प्रतिशत और बोल्सोनारो को 48.24 प्रतिशत वैध वोट मिले। जानिए उनकी जीत, राजनीतिक सफर और विदेश नीति की प्राथमिकताएं।
Brazil Election Result 2026: ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में नया अध्याय जोड़ दिया है। राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने दूसरे दौर के मुकाबले में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया है। 80 वर्षीय लूला को 51.76 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो के खाते में 48.24 प्रतिशत वोट आए। इस जीत के साथ लूला ब्राजील के राष्ट्रपति पद पर चौथा कार्यकाल संभालने जा रहे हैं।
99.97 प्रतिशत वोटों की गिनती में लूला को बढ़त
ब्राजील के मीडिया और डेटा फोल्हा के आंकड़ों के मुताबिक, 99.97 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने तक लूला को 51.76 प्रतिशत वैध मत मिले। वहीं, फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.24 प्रतिशत वोट हासिल हुए। दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला कड़ा रहा।
यह चुनाव ऐसे समय में हुआ, जब महंगाई, रोजमर्रा के खर्च, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे प्रचार के केंद्र में थे। लूला ने ब्राजील की संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर दिया, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो ने अपराध पर सख्त कार्रवाई और खाद्य पदार्थों की कीमतें कम करने का वादा किया था।
पहले दौर में पिछड़ने के बाद लूला ने पलटा मुकाबला
इस चुनाव की खास बात यह रही कि लूला पहले दौर में फ्लावियो बोल्सोनारो से पीछे रहे थे। पहले दौर में फ्लावियो को 47.03 प्रतिशत और लूला को 45.16 प्रतिशत वैध वोट मिले थे। दूसरे दौर में लूला ने बढ़त बनाते हुए राष्ट्रपति चुनाव अपने नाम कर लिया।
ब्राजील के चुनावी इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। रिपोर्टों के मुताबिक, 1989 में प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव की वापसी के बाद यह पहला मौका है, जब पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार दूसरे दौर में जीतकर राष्ट्रपति बना है।
ब्राजील की विदेश नीति पर रहेगी दुनिया की नजर
लूला की जीत का असर ब्राजील की विदेश नीति पर भी दिखाई दे सकता है। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान देश की संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति को प्रमुखता दी। इसके साथ ही उन्होंने विकासशील देशों यानी 'ग्लोबल साउथ' और चीन के साथ करीबी संबंधों की वकालत की है।
लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ब्राजील की विदेश नीति में लूला के अगले कदमों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रहेगी। चुनाव के दौरान दोनों उम्मीदवारों ने देश की सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों को लेकर अपनी-अपनी प्राथमिकताएं सामने रखी थीं।
भ्रष्टाचार के आरोप भी रहे चुनावी चर्चा का हिस्सा
चुनावी मुकाबले के दौरान दोनों उम्मीदवारों पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को लेकर भी चर्चा हुई। इन मामलों में उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम भी सामने आए थे।
लूला को पहले भ्रष्टाचार के मामलों में जेल में रहना पड़ा था। हालांकि, बाद में उनके खिलाफ संबंधित मामलों में फैसले रद्द कर दिए गए। उनकी राजनीतिक वापसी ब्राजील की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम रही है।
यूनियन नेता से राष्ट्रपति तक का सफर
लूला ने 1970 के दशक में मजदूर यूनियन नेता के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने वर्कर्स पार्टी की स्थापना में मदद की और राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ा। वर्ष 2002 में उन्होंने पहली बार राष्ट्रपति चुनाव जीता और 2003 में पद संभाला। 2006 में वह दोबारा चुने गए और 2010 तक राष्ट्रपति रहे।
इसके बाद डिल्मा रूसेफ ने राष्ट्रपति पद संभाला। लूला ने 2022 के चुनाव में फिर जीत हासिल की और 2023 में राष्ट्रपति पद पर लौटे। अब 2026 के चुनाव में जीत के बाद वह चौथा कार्यकाल संभालेंगे।
लूला फरवरी 2026 में भारत भी आए थे। वह नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट में शामिल होने पहुंचे थे। हवाई अड्डे पर उनका स्वागत विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने किया था।