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भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट: 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य, 8 बड़े समझौते

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कानी की वार्ता में 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य तय हुआ। 2.6 अरब डॉलर की यूरेनियम डील सहित आठ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। ऊर्जा, रक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर आधारित नया रोडमैप तैयार किया गया।

 

India Canada Relations: 2023 के आरोपों के बाद आई कूटनीतिक तल्खियों को पीछे छोड़ते हुए भारत और कनाडा ने संबंधों को नई गति देने का निर्णायक संकेत दिया है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नेय के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में व्यापक सहमति बनी।

दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया और इस वर्ष के अंत तक व्यापक आर्थिक समझौते पर हस्ताक्षर की दिशा में काम तेज करने का निर्णय लिया।


यूरेनियम सप्लाई पर 2.6 अरब डॉलर की डील

परमाणु ऊर्जा सहयोग के तहत भारत सरकार और कनाडा की कंपनी Cameco के बीच 2.60 अरब अमेरिकी डॉलर का समझौता हुआ है। इसके तहत 2027 से 2035 के बीच भारत को लगभग 2.20 करोड़ पाउंड यूरेनियम की आपूर्ति की जाएगी।
इसके अलावा दुर्लभ खनिज, ऊर्जा आपूर्ति, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग समेत कुल आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

‘परस्पर सम्मान’ पर आधारित नया रोडमैप

बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और कनाडा लोकतांत्रिक मूल्यों में अटूट विश्वास रखते हैं और विविधता का उत्सव मनाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देश साझा वैश्विक दृष्टि को साझेदारी के अगले चरण में बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि हाल के वर्षों की दूरियों ने संबंधों की गति को प्रभावित किया, लेकिन अब परस्पर सम्मान और आर्थिक सहयोग पर आधारित नया रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

हिंद-प्रशांत में बढ़ेगा सहयोग

संयुक्त बयान में कहा गया कि हिंद महासागर क्षेत्र को लेकर भारत की सोच और कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति में उल्लेखनीय समानताएं हैं। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर भी सहमति जताई। मार्च 2025 में पद संभालने के बाद प्रधानमंत्री कानी की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे द्विपक्षीय संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।