कौन हैं अनिल मेनन? 8 महीने के स्पेस मिशन पर निकले भारतीय मूल के NASA Astronaut
भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने सोयुज MS-29 से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए ऐतिहासिक उड़ान भरी। आठ महीने के मिशन के दौरान वह मानव स्वास्थ्य, माइक्रोग्रैविटी, सेमीकंडक्टर, बायोप्रिंटिंग और भविष्य के चंद्रमा-मंगल मिशनों से जुड़े अहम वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।
Who is Anil Menon: भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन ने मंगलवार को अपने पहले अंतरिक्ष मिशन के लिए ऐतिहासिक उड़ान भर दी। रूस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान के जरिए कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से लॉन्च हुए मेनन अब आठ महीने तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर रहकर भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशनों के लिए अहम वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। यह मिशन न केवल NASA बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ भरी उड़ान
अनिल मेनन इस मिशन में रॉसकॉसमॉस (Roscosmos) के अंतरिक्ष यात्रियों प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ रवाना हुए हैं। लॉन्च के करीब तीन घंटे बाद सोयुज यान के ISS से जुड़ने की योजना है, जहां यह दल Expedition-74 और Expedition-75 का हिस्सा बनेगा।
240 दिनों तक होंगे बड़े वैज्ञानिक प्रयोग
करीब 240 दिनों तक चलने वाले इस मिशन के दौरान अनिल मेनन कई अत्याधुनिक वैज्ञानिक परियोजनाओं पर काम करेंगे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- माइक्रोग्रैविटी में मानव शरीर पर लंबे समय तक रहने वाले प्रभावों का अध्ययन
- हृदय, रक्त प्रवाह और शारीरिक बदलावों पर रिसर्च
- अंतरिक्ष में उच्च गुणवत्ता वाले सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़े प्रयोग
- बायोप्रिंटिंग और जैविक ऊतकों के विकास पर अध्ययन
- भविष्य के आर्टेमिस (Artemis) और मंगल मिशनों के लिए नई तकनीकों का परीक्षण
NASA का मानना है कि इस मिशन से प्राप्त डेटा भविष्य में लंबी अवधि के अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सुरक्षित और सफल बनाने में मदद करेगा।
डॉक्टर, इंजीनियर और स्पेस एक्सपर्ट
अनिल मेनन केवल अंतरिक्ष यात्री ही नहीं, बल्कि इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञ, एयरोस्पेस फिजिशियन, मैकेनिकल इंजीनियर और अमेरिकी स्पेस फोर्स के कर्नल भी हैं। NASA में शामिल होने से पहले वह SpaceX के पहले Flight Surgeon रहे, जहां उन्होंने मानव अंतरिक्ष उड़ानों के लिए मेडिकल सिस्टम विकसित करने में अहम भूमिका निभाई।
अंतरिक्ष में खुद भी होंगे रिसर्च का हिस्सा
इस मिशन की खास बात यह है कि अनिल मेनन केवल वैज्ञानिक प्रयोगों का संचालन ही नहीं करेंगे, बल्कि खुद भी कई मेडिकल स्टडी में टेस्ट सब्जेक्ट के रूप में हिस्सा लेंगे। वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से मानव शरीर में क्या बदलाव आते हैं और भविष्य में इन चुनौतियों से कैसे निपटा जा सकता है।
धरती पर भी मिलेगा फायदा
NASA का कहना है कि इस मिशन से मिलने वाली वैज्ञानिक जानकारी केवल अंतरिक्ष अभियानों तक सीमित नहीं रहेगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, उम्र बढ़ने से जुड़ी बीमारियों के इलाज, नई मेडिकल तकनीकों और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।
अप्रैल 2027 में होगी वापसी
यदि मिशन तय कार्यक्रम के अनुसार पूरा होता है, तो अनिल मेनन और उनके साथी अप्रैल 2027 में पृथ्वी पर लौटेंगे। तब तक वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर लगातार वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी परीक्षण करते रहेंगे।