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अमेरिका-ईरान शांति समझौता फाइनल? ट्रंप का दावा, होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा, 19 जून को होंगे हस्ताक्षर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि 19 जून को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट खोला जाएगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है और भारत समेत कई देशों को राहत मिलने की उम्मीद है।

 

America Iran Peace Deal: करीब 107 दिनों से जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता लगभग तय हो चुका है। ट्रंप के मुताबिक, 19 जून को इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसके बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया जाएगा।

यदि यह समझौता सफल रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है। भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति आसान होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

ट्रंप ने किया समझौते का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वैश्विक जहाजों के लिए खोला जाएगा। साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंध भी हटाए जाएंगे। ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि यह समझौता पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

होर्मुज स्ट्रेट खुलने से दुनिया को क्या फायदा होगा?

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह मार्ग प्रभावित हुआ था, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी। यदि यह रास्ता दोबारा पूरी तरह खुल जाता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होगी और कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

107 दिन से जारी है संघर्ष

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष को 107 दिन से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान क्षेत्र में कई सैन्य कार्रवाइयां हुईं और वैश्विक बाजारों पर भी इसका असर देखने को मिला।

ट्रंप ने दावा किया कि यह समझौता उनके नेतृत्व में संभव हुआ है और इससे पहले कई अमेरिकी प्रशासन ईरान के साथ स्थायी शांति स्थापित करने में सफल नहीं हो सके थे।

न्यूक्लियर कार्यक्रम पर होगी अहम बातचीत

प्रस्तावित समझौते के तहत अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम के भविष्य को लेकर विस्तृत वार्ता होगी। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया में परमाणु संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज की गई संपत्तियों तक पहुंच और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा शामिल होगी।

ईरान की ओर से अभी नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया

हालांकि ट्रंप के दावों के बावजूद ईरान की ओर से समझौते को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इससे पहले भी ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान समझौते पर सहमत हो गया है, लेकिन तेहरान ने उन दावों को खारिज कर दिया था। ईरानी पक्ष पहले यह कह चुका है कि किसी भी समझौते से पहले आर्थिक और वित्तीय शर्तों पर स्पष्ट सहमति जरूरी होगी।

पाकिस्तान और कतर ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संभावित समझौते तक पहुंचने में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। शुरुआती चरण में दोनों देशों के बीच सीमित युद्धविराम कराया गया था, जिसे बाद में बातचीत जारी रखने के लिए बढ़ाया गया।

वैश्विक बाजारों की नजर 19 जून पर

अब पूरी दुनिया की नजर 19 जून पर टिकी है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर हो जाते हैं तो यह न केवल मध्य-पूर्व की राजनीति बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।