नेतन्याहू के 'चुनाव चोरी' के आरोप को इजरायल के अधिकारियों ने किया खारिज, अब आगे क्या होगा?
इजरायल के चुनाव अधिकारियों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चुनाव चोरी और विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच से अंतिम नतीजों पर असर नहीं पड़ेगा। जानें चुनाव में किसे कितनी सीटें मिलीं और अब सरकार गठन की प्रक्रिया में आगे क्या होगा।
इजरायल में संसदीय चुनाव के नतीजों को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव अधिकारियों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के 'चुनाव चोरी' के आरोपों को खारिज कर दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विदेशी हस्तक्षेप की आशंकाओं की जांच जारी है, लेकिन इससे घोषित चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही किसी खास समुदाय के वोटों को अवैध ठहराने का भी कोई आधार नहीं है।
नेतन्याहू की पार्टी ने लगाया था चुनाव चोरी का आरोप
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पार्टी लिकुड ने चुनाव में कथित विदेशी हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठाए थे। पार्टी का आरोप था कि अरब बहुल क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल किया गया। लिकुड ने इसे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश बताते हुए चुनाव को 'चोरी' करार दिया था।
दरअसल, इस बार इजरायल के अरब मतदाताओं की भागीदारी में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई। अरब पार्टियों ने 120 सदस्यीय संसद यानी नेसेट में कुल 19 सीटें हासिल कीं। इस प्रदर्शन ने नेतन्याहू के गठबंधन की स्थिति को कमजोर कर दिया है।
चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा?
इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति के कार्यवाहक महानिदेशक डीन लिवने ने साफ किया कि चुनाव में व्यवस्थित गड़बड़ी या उसकी निष्पक्षता से समझौता किए जाने के आरोपों का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि पूरे चुनाव या किसी विशेष समुदाय के मतदान पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, विदेशी हस्तक्षेप से जुड़ी जांच का अंतिम चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। चुनाव के आधिकारिक नतीजे तय कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग को सौंपे जाएंगे।
विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच कर रही शिन बेट
इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट विदेशी हस्तक्षेप की आशंकाओं की जांच कर रही है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जांच सीमित दायरे में है और इसका उद्देश्य किसी पूरे समुदाय को संदेह के घेरे में लाना नहीं है।
जांच में कथित विदेशी फंडिंग और चुनाव को प्रभावित करने की संभावित कोशिशों से जुड़े पहलुओं को देखा जा रहा है। हालांकि, एजेंसी ने अभी तक जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए हैं। कतर ने भी इजरायल के चुनाव में हस्तक्षेप या किसी गतिविधि को फंड करने के आरोपों से इनकार किया है।
चुनाव के नतीजों में क्या रहा?
अंतिम नतीजों के मुताबिक, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिली हैं। नेतन्याहू के समर्थन वाले गठबंधन को कुल 53 सीटें मिलीं, जबकि उनके विरोधी दलों के गठबंधन के खाते में 48 सीटें आईं। अरब दलों ने 19 सीटें हासिल कीं।
इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में किसी भी पक्ष के पास अपने दम पर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक बातचीत और गठबंधन की संभावनाएं अहम हो गई हैं।
अब आगे क्या होगा?
चुनाव के आधिकारिक नतीजे राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग को सौंपे जाएंगे। इसके बाद राष्ट्रपति राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे और उस सांसद को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे बेहतर संभावना होगी।
सरकार बनाने के लिए नामित उम्मीदवार को संसद में समर्थन हासिल करना होगा। यदि कोई भी पक्ष बहुमत जुटाने में सफल नहीं होता है, तो इजरायल में दोबारा चुनाव कराने की नौबत भी आ सकती है। तब तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।