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JPMorgan CEO Jamie Dimon ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर संभावित अमेरिकी टैरिफ पर चिंता जताई है। उन्होंने अमेरिका से भारतीय रिफाइनरियों और वैश्विक तेल बाजार के असर को समझने की अपील की। नए अमेरिकी कानून में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
 

रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका की संभावित सख्ती के बीच JPMorgan Chase के CEO Jamie Dimon ने वॉशिंगटन को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि रूस पर दबाव बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का असर भारत और वैश्विक तेल बाजार पर नहीं पड़ना चाहिए। Dimon ने अमेरिका से यह भी कहा कि किसी तरह का टैरिफ लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल किस तरह करती हैं।

रूसी तेल पर टैरिफ को लेकर क्या बोले Jamie Dimon?

मुंबई में आयोजित JPMorgan India Investor Conference के दौरान CNBC-TV18 से बातचीत में Jamie Dimon ने कहा कि अमेरिका को पहले इस पूरे मामले के प्रभाव को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस से मुकाबला करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं, लेकिन इस प्रक्रिया में भारत और दुनिया के तेल बाजार को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

Dimon ने रूसी तेल पर टैरिफ लगाने के तरीके पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि तेल पर किसी भी तरह का टैरिफ लगाया जाना चाहिए।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी प्रशासन को मिला है। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार इसकी संभावित जद में हैं।

भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल क्यों अहम?

Jamie Dimon ने भारतीय रिफाइनरियों की तकनीकी जरूरतों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि अलग-अलग रिफाइनरियां हर तरह के कच्चे तेल को एक समान तरीके से प्रोसेस नहीं कर सकतीं। ऐसे में अगर भारत रूसी तेल खरीदना बंद करता है तो सिर्फ किसी दूसरे देश से तेल खरीद लेना पर्याप्त नहीं होगा।

दूसरे स्रोत से मिलने वाला कच्चा तेल किसी खास रिफाइनरी के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए रूसी सप्लाई में अचानक बदलाव से भारतीय रिफाइनिंग व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार दोनों पर असर पड़ सकता है।

ट्रंप प्रशासन ने रूस पर बढ़ाया दबाव

अमेरिका ने रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाने के लिए नया कानून बनाया है। Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के तहत राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीद जारी रखने वाले देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिला है।

अमेरिका का तर्क है कि रूसी ऊर्जा की खरीद से मॉस्को को आर्थिक आय मिलती है और इससे यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस पर लगाए जा रहे आर्थिक दबाव का असर कम हो सकता है। हालांकि, भारत के मामले में इसका असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर भी संभावित टैरिफ का प्रभाव पड़ सकता है।

भारत ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा सबसे पहले

अमेरिकी कदम पर भारत पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि देश की ऊर्जा नीति में भारतीय लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे ऊपर है। भारत अपनी जरूरत के मुताबिक उपलब्धता, कीमत, बाजार की स्थिति और व्यावसायिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखकर तेल खरीद के फैसले करता है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल या सप्लाई में बाधा का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

अगस्त में रूस से भारत की तेल खरीद घटी

इस बीच भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात अगस्त में कम हुआ है। Reuters के टैंकर डेटा के मुताबिक अगस्त में भारत ने रूस से करीब 21 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) कच्चा तेल खरीदा, जो जुलाई की तुलना में 16.5 फीसदी कम है। फिर भी रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है।

अगस्त में भारत का कुल कच्चे तेल का आयात करीब 44.4 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो जुलाई से लगभग 8.8 फीसदी कम और एक साल पहले की तुलना में 9.8 फीसदी कम था। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सितंबर में भी रूस से भारत का तेल आयात घटकर करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी बोले Dimon

Jamie Dimon ने भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता का भी जिक्र किया। उन्होंने दोनों सरकारों से बातचीत जारी रखने और लंबित व्यापार समझौते को पूरा करने की दिशा में काम करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सीमा पार कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए नियमों और कानूनों में स्थिरता और पूर्वानुमान की क्षमता महत्वपूर्ण है। ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध और रूसी तेल को लेकर भारत-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए भी अहम मुद्दा बन गया है।

कुल मिलाकर, रूसी तेल पर अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा अब सिर्फ रूस पर दबाव बनाने तक सीमित नहीं है। इसका संबंध भारत की ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय रिफाइनरियों की जरूरत, वैश्विक तेल कीमतों और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों से भी जुड़ गया है।