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किम जोंग उन का अचानक चीन दौरा, नए यालू नदी पुल से डैंडोंग पहुंचे; दुनियाभर में बढ़ी हलचल
 

 

बीजिंग/सियोल। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने शनिवार को अचानक चीन का दौरा कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। एक साल से अधिक समय बाद चीन पहुंचे किम जोंग उन ने दोनों देशों को जोड़ने वाले नए यालू नदी पुल के रास्ते चीन के पूर्वोत्तर लियाओनिंग प्रांत के डैंडोंग शहर में प्रवेश किया। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच दोबारा कूटनीतिक बातचीत शुरू होने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।

कड़ी सुरक्षा के बीच चीन पहुंचे किम जोंग उन

रिपोर्टों के अनुसार, किम जोंग उन शनिवार को उत्तर कोरिया के सिनुइजू शहर से न्यू यालू नदी पुल पार कर चीन के सीमावर्ती शहर डैंडोंग पहुंचे। उनकी यात्रा को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और कई स्थानों पर यातायात प्रतिबंध लगाए गए।

खबरों के मुताबिक, चीन के प्रधानमंत्री ली च्यांग भी किम जोंग उन से मिलने के लिए डैंडोंग पहुंचे। हालांकि, यात्रा के आधिकारिक कार्यक्रम और दोनों नेताओं के बीच बातचीत के विस्तृत एजेंडे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

ट्रंप और किम के बीच बातचीत की अटकलें तेज

किम जोंग उन की चीन यात्रा का समय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नवंबर में चीन के शेन्जेन शहर में आयोजित होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना के बीच अमेरिका और उत्तर कोरिया के संबंधों पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि, ट्रंप और किम जोंग उन के बीच किसी संभावित मुलाकात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उत्तर कोरिया पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि अमेरिका के साथ बातचीत के लिए उसकी नीतिगत चिंताओं का समाधान आवश्यक है। ऐसे में किम की अचानक चीन यात्रा को क्षेत्रीय कूटनीति और बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

2014 में बनकर तैयार हुआ था पुल, 12 साल बाद खुला

किम जोंग उन जिस न्यू यालू नदी पुल से चीन पहुंचे, उसका निर्माण वर्ष 2014 में ही पूरा हो गया था। लगभग 3.02 किलोमीटर लंबा यह चार लेन वाला पुल उत्तर कोरिया के सिनुइजू और चीन के डैंडोंग शहर को जोड़ता है।

पुल का निर्माण चीन की आर्थिक सहायता से किया गया था, लेकिन उत्तर कोरिया की तरफ संपर्क सड़कों और सीमा शुल्क सुविधाओं का काम पूरा नहीं होने के कारण इसका संचालन लंबे समय तक शुरू नहीं हो सका।

करीब 12 साल के इंतजार के बाद 15 अक्टूबर 2026 को इस पुल को आधिकारिक तौर पर खोल दिया गया। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, माल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

चीन और उत्तर कोरिया के रिश्तों के लिए अहम यात्रा

किम जोंग उन की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 25 अक्टूबर को कोरियाई युद्ध में चीन के हस्तक्षेप की वर्षगांठ मनाई जाएगी। वर्ष 1950 से 1953 तक चले कोरियाई युद्ध में चीन ने उत्तर कोरिया का समर्थन किया था।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, किम का यह दौरा दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकेत हो सकता है। चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का प्रमुख व्यापारिक साझेदार और महत्वपूर्ण कूटनीतिक सहयोगी रहा है।

किम जोंग उन इससे पहले सितंबर 2025 में चीन गए थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। ताजा यात्रा के बाद दोनों देशों के आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हालांकि, इस दौरे के ठोस परिणामों और भविष्य की कूटनीतिक रणनीति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।