{"vars":{"id": "130921:5012"}}

3 दिन में माफी मांगें वरना होगी सख्त कार्रवाई! Meta CEO मार्क जुकरबर्ग पर संसद की कड़ी चेतावनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाने के विवाद में Meta CEO मार्क जुकरबर्ग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। संसदीय समिति ने उन्हें तीन दिन के भीतर व्यक्तिगत माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है। ऐसा नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
 

PM Modi Video Row: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो को लेकर हुए विवाद ने अब नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। Meta के संस्थापक और CEO मार्क जुकरबर्ग को भारतीय संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने तीन दिन के भीतर व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा में माफी नहीं मांगी गई तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से साझा किया गया एक वीडियो कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था। बाद में Meta ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए वीडियो बहाल कर दिया और औपचारिक रूप से खेद भी जताया। हालांकि, संसदीय समिति ने कंपनी की इस सफाई को पर्याप्त नहीं माना।

संसदीय समिति ने क्यों जताई नाराजगी?

सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि केवल कंपनी की ओर से जारी माफीनामा पर्याप्त नहीं है। समिति की मांग है कि मार्क जुकरबर्ग स्वयं सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, क्योंकि मामला भारत के प्रधानमंत्री और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ा है। समिति ने तीन दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है कि समयसीमा समाप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

केंद्र सरकार भी Meta से मांग चुकी है जवाब

इस मामले में केवल संसदीय समिति ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार भी सक्रिय हो गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta की वैश्विक टीम को भारत बुलाकर वीडियो हटाने की घटना, कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली और अन्य संबंधित मुद्दों पर जवाब तलब किया है। सरकार प्लेटफॉर्म के एल्गोरिद्म और कंटेंट प्रबंधन प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही है।

कानूनी संरक्षण पर भी उठे सवाल

समिति के अध्यक्ष ने संकेत दिया है कि यदि Meta इस मामले को गंभीरता से नहीं लेता, तो कंपनी को भारत में मिलने वाले 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) जैसे कानूनी संरक्षण पर भी सवाल उठ सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सरकार के स्तर पर ही होगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर बढ़ी बहस

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भारत में संचालित वैश्विक सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही किस प्रकार तय होनी चाहिए। संसद की समिति पहले भी Meta, Google, X और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से निजता, सार्वजनिक व्यवस्था और कंटेंट मॉडरेशन जैसे मुद्दों पर जवाब मांग चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या मार्क जुकरबर्ग तय समय सीमा के भीतर व्यक्तिगत माफी मांगते हैं या मामला आगे कानूनी और संसदीय कार्रवाई की दिशा में बढ़ता है।