मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा तो भारत में महंगाई का खतरा: सीमेंट से लेकर प्लास्टिक उद्योग तक मंडराया खतरा
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से भारत के आयात-निर्यात पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। खाद, रफ डायमंड, सिंथेटिक यार्न और पोलीथिलीन जैसे उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए अंतर-मंत्रालयी कमेटी बनाई है, जबकि निर्यातकों ने उत्पादन की रफ्तार धीमी कर दी है।
Middle East crisis impact: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के जल्द समाप्त होने की संभावना कम दिखने के कारण भारतीय निर्यातकों और आयातकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इस क्षेत्र में तनाव के चलते कई महत्वपूर्ण उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली, तो भारत में खाद, रफ डायमंड, सिंथेटिक यार्न और पोलीथिलीन जैसे औद्योगिक कच्चे माल की कमी देखने को मिल सकती है।
व्यापार जगत से जुड़े कई निर्यातकों ने अनिश्चितता के चलते उत्पादन की रफ्तार भी धीमी कर दी है। हालांकि केंद्र सरकार ने संभावित संकट से निपटने के लिए कदम उठाते हुए एक अंतर-मंत्रालयी कमेटी का गठन किया है, जो आयात-निर्यात में आने वाली बाधाओं पर नजर रखेगी और समाधान में मदद करेगी।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) भी रियल-टाइम आधार पर व्यापार से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी कर रहा है और विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करने में जुटा है।
अमेरिकी शुल्क में कटौती का फायदा भी नहीं उठा पा रहे निर्यातक
निर्यातकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण वे अमेरिकी शुल्क में हालिया कटौती का लाभ भी नहीं उठा पा रहे हैं। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका ने अगले 150 दिनों के लिए सभी देशों पर समान रूप से 10 प्रतिशत शुल्क लागू किया है।
इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों को उम्मीद थी कि अमेरिका को निर्यात में इस महीने बड़ी वृद्धि होगी, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन की अनिश्चितता ने इन उम्मीदों को झटका दिया है।
भारत का पश्चिम एशिया पर बड़ा आयात निर्भरता
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार भारत हर साल पश्चिम एशिया से करीब 100 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों का आयात करता है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी पेट्रोलियम और गैस की है।
इसके अलावा रफ डायमंड और सिंथेटिक यार्न का बड़ा हिस्सा भी पश्चिम एशिया से ही आयात किया जाता है। भारत हर साल करीब 3.7 अरब डॉलर की खाद भी इसी क्षेत्र के देशों से मंगाता है।
भारत के कृषि उत्पादों के निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भी इसी क्षेत्र के देशों में जाता है। पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों में ईरान, इराक, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजरायल शामिल हैं।
नाइट्रोजन खाद का 30 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से
पिछले वर्ष भारत ने पश्चिम एशिया से 3.7 अरब डॉलर मूल्य की खाद का आयात किया था। इनमें नाइट्रोजन आधारित खाद का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। यदि संघर्ष लंबा चलता है तो इसकी आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है।
इसी तरह वर्ष 2025 में भारत ने 6.8 अरब डॉलर के रफ डायमंड का आयात पश्चिम एशिया से किया, जो कुल आयात का लगभग 40 प्रतिशत है। भारत इन कच्चे हीरों को आयात कर उनमें वैल्यू एडिशन करता है और फिर वैश्विक बाजार में निर्यात करता है। सूरत को इस उद्योग का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
पोलीथिलीन और कच्चे माल की कमी से उद्योग चिंतित
पश्चिम एशिया से पैकेजिंग और प्लास्टिक पाइप उद्योग में इस्तेमाल होने वाले पोलीथिलीन का लगभग 35 प्रतिशत आयात होता है। पिछले वर्ष भारत ने इस क्षेत्र से करीब 1.2 अरब डॉलर के पोलीथिलीन और पोलिमर्स आयात किए थे। यदि इस सप्लाई पर असर पड़ता है, तो प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
सीमेंट की कीमतों पर भी पड़ सकता है असर
पश्चिम एशिया से आने वाले लाइमस्टोन की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना भी जताई जा रही है। लाइमस्टोन सीमेंट निर्माण का प्रमुख कच्चा माल है। यदि इसका आयात महंगा होता है, तो सीमेंट की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर पड़ेगा।