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Pax Silica Alliance: भारत की एंट्री से मजबूत हुआ टेक गठबंधन, चीन की बढ़ेगी टेंशन

भारत अमेरिका के नेतृत्व वाले Pax Silica गठबंधन में शामिल हो गया है, जिससे सदस्य देश 10 हो गए हैं। यह गठबंधन AI, रेयर अर्थ मिनरल्स और टेक सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने के लिए बनाया गया है। इसे चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने वाले बड़े रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

 

Pax Silica Alliance: अमेरिका के नेतृत्व वाले महत्वपूर्ण रणनीतिक और तकनीकी गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में भारत के शामिल होने के साथ ही सदस्य देशों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। वैश्विक रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ इसे 21वीं सदी के सबसे अहम तकनीकी और आर्थिक गठबंधनों में से एक मान रहे हैं। माना जा रहा है कि ‘क्वाड’ के बाद यह नया गठबंधन चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने की दिशा में बड़ा कदम है, क्योंकि अब तक दुर्लभ खनिजों और टेक सप्लाई चेन पर चीन का मजबूत नियंत्रण रहा है।

‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। इसकी शुरुआत 12 दिसंबर 2025 को वॉशिंगटन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हुई थी। ‘पैक्स’ शब्द का अर्थ शांति, स्थिरता और समृद्धि होता है। 

अमेरिका के आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेल्बर्ग के अनुसार, 20वीं सदी में दुनिया तेल और स्टील से चलती थी, लेकिन 21वीं सदी में कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक की भूमिका सबसे अहम हो गई है। इन तकनीकों के निर्माण के लिए लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ मिनरल्स जैसे संसाधन बेहद जरूरी हैं।

इस गठबंधन के तहत सदस्य देश ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, हाईटेक फैक्ट्रियां, एआई मॉडल और तकनीकी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाएंगे। इसका लक्ष्य आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना, नई तकनीकों का विकास करना और वैश्विक सप्लाई चेन को स्थिर बनाना है। सदस्य देशों ने साझा घोषणा में स्पष्ट किया है कि सुरक्षित एआई सिस्टम भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे और वे तकनीकी प्रगति और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम करेंगे।

भारत से पहले इस समझौते पर ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजरायल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन हस्ताक्षर कर चुके थे। इसके अलावा कनाडा, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड, ओईसीडी और ताइवान जैसे देश भी इस पहल से जुड़े हुए हैं। भारत के शामिल होने से इस गठबंधन की रणनीतिक और आर्थिक ताकत और अधिक बढ़ गई है।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस गठबंधन का एक प्रमुख उद्देश्य किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है। इसका मतलब है कि सदस्य देश भविष्य में तकनीक, खनिज और निर्माण के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेंगे। हालांकि इस गठबंधन में चीन का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन इसे चीन के प्रभुत्व को संतुलित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।


दरअसल, वर्तमान में दुर्लभ खनिजों की वैश्विक आपूर्ति पर चीन का बड़ा नियंत्रण है। दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा चीन के पास है। ये खनिज आधुनिक तकनीक के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इनका उपयोग सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, हथियारों और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में होता है। ऐसे में ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन भविष्य में वैश्विक तकनीकी और आर्थिक शक्ति संतुलन को बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है।