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कौन हैं बीजू पटनायक जिसने बचाई थी इंडोनेशिया के नेताओं की जान, PM मोदी ने संसद में सुनाई 79 साल पुरानी कहानी

इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व ओडिशा मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को भारत-इंडोनेशिया संबंधों का सबसे बड़ा नायक बताया। उन्होंने 1947 में इंडोनेशियाई नेताओं को सुरक्षित भारत लाने के ऐतिहासिक मिशन का जिक्र किया, जिसने दोनों देशों की दोस्ती को नई पहचान दी।
 

PM Modi Indonesia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और इंडोनेशिया अब अपने रिश्तों के "स्वर्णिम दौर" में प्रवेश कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के मजबूत संबंधों की नींव रखने का श्रेय ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक को दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत और इंडोनेशिया के बीच जो भरोसा और साझेदारी दिखाई देती है, उसकी मजबूत शुरुआत बीजू पटनायक के साहसिक मिशन से हुई थी।

1947 में बीजू पटनायक ने निभाया था ऐतिहासिक मिशन

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इंडोनेशिया ने 1945 में आजादी की घोषणा की थी, लेकिन इसके बाद डच सेना ने दोबारा कब्जा करने के लिए सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। उस समय भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बीजू पटनायक को एक बेहद जोखिम भरा मिशन सौंपा।

बीजू पटनायक ने अपनी पत्नी ज्ञान पटनायक के साथ विमान उड़ाकर युद्धग्रस्त जावा पहुंचकर इंडोनेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री सुतान सजहरीर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हट्टा को सुरक्षित भारत पहुंचाया। यह मिशन उस दौर के सबसे साहसी अभियानों में गिना जाता है।

डच सेना की धमकियों के बावजूद नहीं रुके

बताया जाता है कि जब बीजू पटनायक का विमान सिंगापुर से जावा की ओर जा रहा था, तब डच सेना ने विमान को मार गिराने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद उन्होंने मिशन बीच में नहीं छोड़ा और इंडोनेशियाई नेताओं को सुरक्षित भारत ले आए।

भारत पहुंचने के बाद दोनों नेताओं ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुनिया के सामने इंडोनेशिया की स्थिति रखी। इसके बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त राष्ट्र में डच सैन्य कार्रवाई का विरोध किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा और अंततः डच सेना को पीछे हटना पड़ा।

PM मोदी बोले- बीजू पटनायक ने दोनों देशों को और करीब लाया

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बीजू पटनायक ने जिस साहस और समर्पण के साथ इंडोनेशिया के नेताओं को सुरक्षित भारत पहुंचाया, उसने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा इंडोनेशिया की आजादी और संप्रभुता का समर्थन किया और यही विश्वास आज भी दोनों देशों की साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत है।

इंडोनेशिया ने दिया था सर्वोच्च सम्मान

बीजू पटनायक के इस साहसिक अभियान को कभी नहीं भुलाया गया। इंडोनेशिया सरकार ने उन्हें 1955 में 'बिंतांग जासा उतामा' (First Class Star of Service) से सम्मानित किया, जो देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल है।

दिलचस्प बात यह भी है कि इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो ने अपनी नवजात बेटी का नाम रखने की जिम्मेदारी बीजू पटनायक को दी थी। उन्होंने बच्ची का नाम मेगावती रखा, जो आगे चलकर इंडोनेशिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं।

मौत पर सात दिन का राष्ट्रीय शोक

बीजू पटनायक का इंडोनेशिया से रिश्ता सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक भी था। 1997 में उनके निधन पर इंडोनेशिया ने सात दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की थी। आज भी नई दिल्ली स्थित इंडोनेशियाई दूतावास में उनके सम्मान में एक विशेष कक्ष बनाया गया है, जो दोनों देशों की ऐतिहासिक मित्रता का प्रतीक माना जाता है।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगी नई गति

प्रधानमंत्री मोदी की तीन दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा के दौरान रक्षा, समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक संपर्क, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक और व्यापार जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और इंडोनेशिया अब अपने रिश्तों के "स्वर्णिम दौर" में प्रवेश कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के मजबूत संबंधों की नींव रखने का श्रेय ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक को दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत और इंडोनेशिया के बीच जो भरोसा और साझेदारी दिखाई देती है, उसकी मजबूत शुरुआत बीजू पटनायक के साहसिक मिशन से हुई थी।

1947 में बीजू पटनायक ने निभाया था ऐतिहासिक मिशन

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इंडोनेशिया ने 1945 में आजादी की घोषणा की थी, लेकिन इसके बाद डच सेना ने दोबारा कब्जा करने के लिए सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। उस समय भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बीजू पटनायक को एक बेहद जोखिम भरा मिशन सौंपा।

बीजू पटनायक ने अपनी पत्नी ज्ञान पटनायक के साथ विमान उड़ाकर युद्धग्रस्त जावा पहुंचकर इंडोनेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री सुतान सजहरीर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हट्टा को सुरक्षित भारत पहुंचाया। यह मिशन उस दौर के सबसे साहसी अभियानों में गिना जाता है।

डच सेना की धमकियों के बावजूद नहीं रुके

बताया जाता है कि जब बीजू पटनायक का विमान सिंगापुर से जावा की ओर जा रहा था, तब डच सेना ने विमान को मार गिराने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद उन्होंने मिशन बीच में नहीं छोड़ा और इंडोनेशियाई नेताओं को सुरक्षित भारत ले आए।

भारत पहुंचने के बाद दोनों नेताओं ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुनिया के सामने इंडोनेशिया की स्थिति रखी। इसके बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त राष्ट्र में डच सैन्य कार्रवाई का विरोध किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा और अंततः डच सेना को पीछे हटना पड़ा।

PM मोदी बोले- बीजू पटनायक ने दोनों देशों को और करीब लाया

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बीजू पटनायक ने जिस साहस और समर्पण के साथ इंडोनेशिया के नेताओं को सुरक्षित भारत पहुंचाया, उसने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा इंडोनेशिया की आजादी और संप्रभुता का समर्थन किया और यही विश्वास आज भी दोनों देशों की साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत है।

इंडोनेशिया ने दिया था सर्वोच्च सम्मान

बीजू पटनायक के इस साहसिक अभियान को कभी नहीं भुलाया गया। इंडोनेशिया सरकार ने उन्हें 1955 में 'बिंतांग जासा उतामा' (First Class Star of Service) से सम्मानित किया, जो देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल है।

दिलचस्प बात यह भी है कि इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो ने अपनी नवजात बेटी का नाम रखने की जिम्मेदारी बीजू पटनायक को दी थी। उन्होंने बच्ची का नाम मेगावती रखा, जो आगे चलकर इंडोनेशिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं।

मौत पर सात दिन का राष्ट्रीय शोक

बीजू पटनायक का इंडोनेशिया से रिश्ता सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक भी था। 1997 में उनके निधन पर इंडोनेशिया ने सात दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की थी। आज भी नई दिल्ली स्थित इंडोनेशियाई दूतावास में उनके सम्मान में एक विशेष कक्ष बनाया गया है, जो दोनों देशों की ऐतिहासिक मित्रता का प्रतीक माना जाता है।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगी नई गति

प्रधानमंत्री मोदी की तीन दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा के दौरान रक्षा, समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक संपर्क, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक और व्यापार जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।