PM Modi-Pezeshkian Meeting: ईरान के राष्ट्रपति से मिले मोदी, अमेरिका से युद्ध के बीच हुई पहली आमने-सामने मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO Summit 2026 के दौरान बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने बैठक है। मुलाकात ऐसे समय हुई है जब लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की है।
PM Modi-Pezeshkian Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन से इतर हुई। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने मुलाकात है।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अमेरिका ने एक दिन पहले ईरान के लारक द्वीप पर दो सैन्य लॉन्चरों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले का दावा किया है। ऐसे में मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात को पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच अहम माना जा रहा है।
युद्ध शुरू होने के बाद पहली आमने-सामने मुलाकात
फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी लगातार ईरानी नेतृत्व के संपर्क में रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच इससे पहले फोन पर बातचीत हो चुकी है, लेकिन बिश्केक में हुई बैठक इस अवधि में उनकी पहली व्यक्तिगत मुलाकात है।
भारत ने लगातार पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और विवादों का समाधान बातचीत एवं कूटनीति के माध्यम से करने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बातचीत में क्षेत्र में शांति और स्थिरता के साथ-साथ ऊर्जा और व्यापार की निर्बाध आवाजाही को भी महत्वपूर्ण बताया है।
30 जून को भी हुई थी मोदी-पेजेशकियन की फोन पर बात
मोदी और पेजेशकियन के बीच 30 जून को फोन पर बातचीत हुई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, उस दौरान पेजेशकियन ने मोदी को पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम और आगे की स्थिति की जानकारी दी थी।
प्रधानमंत्री ने भारत की उस स्थायी नीति को दोहराया था कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने तथा नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया था।
इससे पहले मार्च में हुई बातचीत में भी प्रधानमंत्री ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताते हुए ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा एवं वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही को भारत की प्राथमिकता बताया था।
मुलाकात से पहले ही बढ़ा था अमेरिका-ईरान तनाव
मोदी-पेजेशकियन बैठक से कुछ घंटे पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर भड़क गया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप पर मौजूद दो लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना था कि ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स इन लॉन्चरों के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें पहुंचाने की तैयारी कर रहे थे।
अमेरिका की यह कार्रवाई जुलाई के बाद ईरान के खिलाफ उसकी पहली ज्ञात सैन्य कार्रवाई बताई गई है। हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी को अमल में लाने का दावा किया।
ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया
ईरान के IRGC ने दावा किया कि उसने लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के जवाब में जॉर्डन स्थित दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों—किंग हुसैन और अल-अज्राक—को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। रॉयटर्स के अनुसार, यह दावा ईरानी मीडिया के हवाले से सामने आया है।
अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं। इसलिए हमले से हुए नुकसान और सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर सावधानी जरूरी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों बना बड़ा मुद्दा?
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील बिंदुओं में शामिल है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव या नौवहन में बाधा का असर तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ सकता है।
लारक द्वीप इसी रणनीतिक जलमार्ग के पास स्थित है। इसलिए यहां अमेरिकी कार्रवाई और उसके बाद ईरान की प्रतिक्रिया ने पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है। ताजा घटनाक्रम के बाद तेल बाजार में भी तेजी देखने को मिली है।
SCO Summit में भारत की प्राथमिकताएं
प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान में 26वें SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। भारत सरकार के अनुसार, इस दौरे में प्रधानमंत्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर से जुड़े भारत के प्राथमिक मुद्दों को सामने रखेंगे। सम्मेलन के दौरान वह SCO नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर रहे हैं।
मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया का संकट केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ रहा है। ऐसे में भारत की संवाद और कूटनीति पर जोर देने वाली नीति के लिहाज से यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।