Donald Trump को नोबेल पुरस्कार मिलना मुश्किल? लिस्ट में उनका नाम क्यों नहीं, ये है वजह..
Donald Trump Nobel Prize: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार (Donald Trump Nobel Prize) पाने के लिए खासे बेकरार हैं। या कहिए बच्चों की तरह रोए पड़े हैं। उन्होंने तो ये तक कह दिया कि मुझे नोबेल प्राइज नहीं मिलो तो ये अमेरिका के लिए बड़ा अपमानजनक बात हो जाएगी। इसके लिए वह भारत-पाकिस्तान समेत सात देशों के बीच युद्ध रुकवाने का दावा कर चुके हैं और गाजा व यूक्रेन में भी युद्ध रुकवाने के हरसंभव प्रयास में जुटे हैं। ओस्लो में 10 अक्तूबर को होने वाले पुरस्कारों के एलान के लिए इस बार दौड़ में 338 दावेदार हैं, मंगर ट्रंप का नाम समयसीमा बीतने के बाद भेजा गया, इसलिए पूरी संभावना है कि, वह 2025 के दावेदारों में शामिल नहीं किए गए हैं।
पुरस्कार देने वाली नॉर्वेजियन नोबेल समिति के मुताबिक, शांति के नोबेल का सबसे मेन क्राइेरिया ही काफी कठिन हैं। यह सिर्फ उसे दिया जाता है, जिसने राष्ट्रों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने, स्थायी सेनाओं को खत्म करने या कम करने और शांति सम्मेलनों की स्थापना और संवर्धन के लिए सबसे अधिक या बेस्ट काम किया हो। पुरस्कार की तैयारी का काम देखने वाले नोबेल शांति पुरस्कार समिति के सचिव क्रिस्टियन बर्ग हार्पविकेन के मुताबिक, विनर चुनना आसान नहीं होता। उनके अनुसार, यह पुरस्कार मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर समझना चाहिए। समिति दुनिया में हो रही घटनाओं, अंतरराष्ट्रीय रुझानों, बड़ी चिंताओं और सबसे आशाजनक प्रक्रियाएं मसलन, फिर चाहे वह शांति प्रक्रिया हो या नया अंतरराष्ट्रीय समझौता तक हो सकती हैं।
इस तरह तय होता है नोबेल
नॉर्वेजियन नोबेल समिति में नॉर्वे की संसद के नियुक्त 5 लोग होते हैं। ये सदस्य अक्सर रिटायर्ड राजनेता होते हैं, लेकिन हमेशा नहीं। वर्तमान समिति का नेतृत्व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले समूह पीईएन इंटरनेशनल की नॉर्वेजियन शाखा के प्रमुख करते हैं। एक अन्य सदस्य एक शिक्षाविद हैं। इन सभी सदस्यों को नॉर्वेजियन राजनीतिक दल नामित करते हैं और इनकी नियुक्तियां नॉर्वे की संसद में शक्ति संतुलन को उजागर करती हैं।
कोई भी ऐसा शख्स जो स्वीडिश उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल की 1895 की वसीयत में दिए गए विवरण पर खरा उतरे, वह नोबेल पुरस्कार का हकदार होता है। यहां तक कि नोबेल शांति पुरस्कार पुरस्कार समिति के सचिव क्रिस्टियन बर्ग हार्पविकेन भी चर्चाओं में शामिल हो सकते हैं, लेकिन मतदान नहीं कर सकते।
50 वर्ष तक गुप्त रहते हैं दावेदारों के नाम
हजारों लोग नामों का प्रस्ताव कर सकते हैं। इनमें सरकारों और संसदों के सदस्य, वर्तमान राष्ट्राध्यक्ष, इतिहास, सामाजिक विज्ञान, कानून और दर्शनशास्त्र के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और पूर्व नोबेल शांति पुरस्कार विजेता या अन्य शामिल होते है। इस साल पुरस्कार के लिए 338 नॉमिनेटेड शख्स हैं। इन नामों की पूरी लिस्ट 50 साल तक गोपनीय ही बनी रहती है। हालांकि कुछ लोग अपने नामांकन खुद बता देते हैं।
जरूरत पड़ने पर ही मतदान
हार्पविकेन बताते हैं कि नामांकन 31 जनवरी को बंद हो जाते हैं। समिति सदस्य अपनी पहली बैठक (फरवरी) तक नाम जोड़ सकते हैं। उसके बाद सभी नामों की समीक्षा कर एक शॉर्टलिस्ट बनाई जाती है। हर उम्मीदवार का मूल्यांकन स्थायी सलाहकार और विशेषज्ञों करते हैं। समिति लगभग महीने में एक बार मिलती है और आमतौर पर निर्णय अगस्त या सितंबर में लेती है। समिति सहमति से फैसला चाहती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर मतदान होता है। आखिरी बार समिति सदस्य का विरोध में इस्तीफा 1994 में हुआ था, तब फलस्तीनी नेता यासिर अराफात के इस्राइल के शिमोन पेरेज और यित्जाक राबिन को संयुक्त तौर पर नोबेल पुरस्कार मिला था।
इन देशों के बीच चल रहे युद्ध को रुकवाने का दावा करते हैं ट्रंप
अब बात करें ट्रंप की तो वो भारत और पाकिस्तान, इजरायल और ईरान, आर्मेनिया और अजरबैजान, कांगो और रवांडा, कंबोडिया और थाईलैंड, मिश्र और इथियोपिया, कोसोवो और सर्बिया जैसे देशों के संघर्ष को रुकवाने का दावा कर रहे हैं।
ट्रंप ने अपनी वाह-वाही करते हुए कहा-'यह शानदार है। कोई ऐसा कभी नहीं कर पाया। फिर भी, क्या आपको नोबेल पुरस्कार (Donald Trump Nobel Prize) मिलेगा? बिल्कुल नहीं। वे इसे किसी ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने कुछ भी नहीं किया होगा। वे इसे ऐसे व्यक्ति को देंगे, जिसने डोनल्ड ट्रंप के विचारों और युद्ध को सुलझाने के लिए क्या किया गया, इस पर कोई किताब लिखी है.. जी हां, नोबेल पुरस्कार किसी लेखक को मिलेगा। लेकिन अब देखते हैं आखिर होता क्या है।'
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