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रूस ने 25 साल बाद गोल्ड रिजर्व बेचना शुरू किया, यूक्रेन युद्ध के बढ़ते खर्च से बढ़ा आर्थिक दबाव

 

Moscow : यूक्रेन के साथ जारी युद्ध के बीच रूस की अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव के संकेत मिलने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने करीब 25 साल बाद पहली बार अपने सेंट्रल बैंक के रिजर्व से सोना बेचना शुरू किया है। जर्मनी स्थित मीडिया प्लेटफॉर्म bne IntelliNews की रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, रेगुलेटरी आंकड़ों से पता चलता है कि 2022 से 2025 के बीच रूस ने 15 ट्रिलियन रूबल (करीब 150 अरब डॉलर) से ज्यादा का सोना और विदेशी मुद्रा बेच दी है। वहीं 2026 के शुरुआती दो महीनों में ही करीब 3.5 ट्रिलियन रूबल (करीब 35 अरब डॉलर) की अतिरिक्त बिक्री की गई है। बताया गया है कि जनवरी 2026 में रूस के केंद्रीय बैंक ने करीब 3 लाख औंस सोना, जबकि फरवरी में करीब 2 लाख औंस सोना बाजार में बेचा।

यूक्रेन युद्ध बना बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि Russia–Ukraine War के लंबा खिंचने से रूस पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है। युद्ध अब अपने चौथे साल में प्रवेश कर चुका है, जिसके चलते सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है।

इस साल रूस ने अपने रक्षा बजट में 14.5 ट्रिलियन रूबल से अधिक का आवंटन किया है, जो कुल सरकारी खर्च का लगभग 40 प्रतिशत है। केवल टैक्स से इतनी बड़ी राशि जुटाना संभव नहीं हो पा रहा है, इसलिए सरकार को अपने रिजर्व का सहारा लेना पड़ रहा है।

प्रतिबंधों से भी घट रही आय

यूक्रेन युद्ध के बाद कई पश्चिमी देशों ने रूस के तेल और गैस निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं। यही रूस की आय का प्रमुख स्रोत रहा है। इन प्रतिबंधों के कारण 2025 में रूस का बजट घाटा 2.6 से 3.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

बदली रूस की रणनीति

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले Central Bank of Russia और वित्त मंत्रालय केवल कागजी तौर पर गोल्ड ट्रांसफर करते थे, लेकिन अब गोल्ड रिजर्व से असली सोने की ईंटें निकालकर बाजार में बेची जा रही हैं।

लगातार बिक्री के कारण रूस का गोल्ड रिजर्व घटकर 74.3 मिलियन औंस के करीब पहुंच गया है, जो पिछले चार सालों का सबसे निचला स्तर है। इससे साफ संकेत मिलता है कि युद्ध के चौथे साल में रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव काफी बढ़ चुका है।