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रूस के डर से यूरोप में बढ़ी हलचल, NATO देशों ने शुरू की युद्ध की तैयारी; जानें कितना बड़ा है खतरा

रूस और NATO के बीच बढ़ते तनाव के बीच यूरोप में सुरक्षा तैयारियां तेज हो गई हैं। फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड और बाल्टिक देश ड्रोन, मिसाइल, साइबर हमले और संभावित युद्ध की स्थिति के लिए इमरजेंसी प्लान तैयार कर रहे हैं। हालांकि, रूस के NATO पर हमला करने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
 

Russia NATO Tension: रूस और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के बीच कई यूरोपीय देश संभावित बड़े सुरक्षा संकट से निपटने की तैयारी में जुट गए हैं। फ्रांस से लेकर जर्मनी, पोलैंड, लिथुआनिया और फिनलैंड तक सरकारें ड्रोन और मिसाइल हमलों, साइबर अटैक, तोड़फोड़ और दूसरी तरह की हाइब्रिड गतिविधियों से निपटने के लिए अपनी तैयारियां मजबूत कर रही हैं। हालांकि, अभी ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं है कि रूस ने किसी NATO देश पर हमला करने का फैसला किया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल में यूरोप और फ्रांस के सामने बढ़ते रूसी ‘हाइब्रिड खतरे’ को लेकर चेतावनी दी। वहीं पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने संसद में कहा कि खुफिया आकलनों के अनुसार रूस यूक्रेन का समर्थन करने वाले देशों को ड्रोन या मिसाइल हमलों से निशाना बना सकता है। उनकी चिंता यह भी है कि ऐसे हमलों को दुर्घटना बताकर NATO की सामूहिक रक्षा व्यवस्था को परखा जा सकता है।

फ्रांस ने महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाई

मैक्रों ने कहा है कि फ्रांस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और रक्षा उद्योग से जुड़े संवेदनशील ठिकानों को ड्रोन और साइबर हमलों से बचाने के लिए योजना तैयार कर रहा है। उनका कहना है कि हाल के रूसी हाइब्रिड हमलों को बिना जवाब के नहीं छोड़ा जाएगा।

यूरोपीय देशों की चिंता केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं है। हाइब्रिड वॉरफेयर में साइबर हमले, तोड़फोड़, दुष्प्रचार, राजनीतिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप और ड्रोन जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। यूरोपीय अधिकारी इनमें से कई गतिविधियों के लिए रूस पर आरोप लगाते रहे हैं, जबकि मॉस्को ने ऐसे आरोपों से इनकार किया है।

पोलैंड को ड्रोन-मिसाइल हमले की आशंका

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने चेतावनी दी कि रूस NATO की सीमा के अंदर ड्रोन या मिसाइल से ऐसी घटनाएं पैदा कर सकता है, जिन्हें बाद में दुर्घटना बताया जाए। उनके मुताबिक, बार-बार ऐसी घटनाओं के जरिए NATO देशों की सामूहिक रक्षा व्यवस्था में भरोसा कमजोर करने की कोशिश हो सकती है।

इसी बीच बाल्टिक क्षेत्र में NATO की सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। जर्मनी और स्वीडन समेत NATO देशों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गॉटलैंड द्वीप के आसपास सैन्य अभ्यास किए हैं।

जर्मनी में अस्पतालों से लेकर मेडिकल व्यवस्था तक तैयारी

रूस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच जर्मनी भी अपनी आपातकालीन तैयारियां मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभावित बड़े संघर्ष की स्थिति के लिए तैयार किया जा रहा है।

जर्मनी के सैन्य अस्पतालों पर बड़ी संख्या में घायल सैनिकों के आने की स्थिति को लेकर तैयारी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर नागरिक अस्पतालों को भी युद्ध में घायल लोगों के इलाज में लगाया जा सकता है। इसके अलावा शीत युद्ध के दौर की कुछ मेडिकल सुविधाओं को भी दोबारा तैयार किया जा रहा है।

लिथुआनिया और पोलैंड ने तैयार किए इमरजेंसी प्लान

यूरोप के कई देश नागरिकों की सुरक्षा और संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए योजनाएं अपडेट कर रहे हैं।

लिथुआनिया ने राष्ट्रीय निकासी योजना तैयार की है। इसमें अनुमान लगाया गया है कि करीब 75 प्रतिशत आबादी जरूरत पड़ने पर खुद सुरक्षित स्थान तक पहुंच सकती है, जबकि बाकी लोगों को प्रशासन की मदद की जरूरत होगी।

पोलैंड ने भी युद्ध, सैन्य खतरे और अन्य आपात स्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी निकासी योजनाओं को अपडेट किया है। वहीं फिनलैंड ने ड्रोन खतरे और एयर-रेड चेतावनी को अपनी राष्ट्रीय तैयारी व्यवस्था में शामिल किया है।

लातविया ने रूस से लगती अपनी पूर्वी सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने के साथ ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमता मजबूत की है। ब्रिटेन भी लोगों से आपात स्थिति के लिए जरूरी सामान घर में रखने की अपील कर रहा है।

रूस का दावा- यूरोप से युद्ध नहीं चाहता मॉस्को

यूरोपीय देशों की तैयारियों के बीच रूस ने इन चिंताओं को खारिज किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 19 सितंबर को कहा कि रूस की यूरोप या यूरोपीय देशों के खिलाफ कोई आक्रामक मंशा नहीं है। उन्होंने यूरोपीय देशों के साथ संबंध सुधारने और सहयोग करने की इच्छा भी जताई।

पुतिन ने यूरोपीय नेताओं पर रूस के कथित खतरे का इस्तेमाल अपनी नीतियों को सही ठहराने के लिए करने का आरोप लगाया। उन्होंने NATO के बाल्टिक क्षेत्र में सैन्य अभ्यासों की भी आलोचना की और कहा कि रूस जरूरत पड़ने पर जवाब देगा।

अमेरिका की सेना घटने की खबर से बढ़ी चिंता

यूरोप की चिंता उस समय और बढ़ी है जब अमेरिका की यूरोप में सैन्य मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग यूरोप से 25 हजार से 40 हजार सैनिकों की संभावित वापसी के विकल्पों पर विचार कर रहा है। फिलहाल करीब 80 हजार अमेरिकी सैनिक यूरोप में तैनात हैं और इस संबंध में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे देशों पर इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। हालांकि, सैनिकों की संभावित कमी का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका NATO छोड़ रहा है या सैनिकों की वापसी का आदेश दिया जा चुका है।

क्या रूस सच में NATO पर हमला करेगा?

फिलहाल इसका कोई पुख्ता संकेत नहीं है कि रूस ने किसी NATO देश पर हमला करने का फैसला किया है। यूरोपीय देशों की मौजूदा गतिविधियां मुख्य रूप से संभावित खतरे के लिए तैयारी हैं।

हालांकि, यूरोपीय सरकारें रूस की हाइब्रिड गतिविधियों, ड्रोन और साइबर हमलों तथा NATO के पूर्वी हिस्से में संभावित तनाव को गंभीर सुरक्षा चुनौती मान रही हैं। ऐसे में यूरोप की रणनीति फिलहाल युद्ध की घोषणा से ज्यादा किसी भी संभावित संकट के लिए तैयार रहने की दिखाई दे रही है।