क्या रूस-यूक्रेन युद्ध अब NATO तक पहुंचेगा? कीव पर मिसाइल और ड्रोन अटैक, काला सागर में भी तनाव
रूस-यूक्रेन युद्ध में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। कीव समेत कई यूक्रेनी इलाकों में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबर है। काला सागर और NATO की पूर्वी सीमा पर भी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। जानिए कीव हमले, NATO की चिंता और युद्ध के संभावित विस्तार की पूरी कहानी।
Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर गंभीर मोड़ लेता नजर आ रहा है। हाल के दिनों में रूस की ओर से यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई इलाकों में बड़े हवाई हमलों की खबर सामने आई है। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के इस्तेमाल का दावा किया गया है। दूसरी ओर, काला सागर में भी तनाव बढ़ा है और NATO की पूर्वी सीमा पर सैन्य तैयारियां तेज हुई हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की इस बीच सर्बिया पहुंचे हैं। वहीं रोमानिया ने अपनी सीमा के आसपास ड्रोन से निपटने के लिए F-35 लड़ाकू विमानों के साथ अभ्यास किया है। इन घटनाक्रमों के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगा है कि क्या रूस-यूक्रेन युद्ध का असर NATO के सदस्य देशों तक पहुंच सकता है।
कीव पर रात में ताबड़तोड़ मिसाइल हमले का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, 7 और 8 अगस्त की दरम्यानी रात कीव को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया। रिपोर्ट में छह इस्कंदर-M मिसाइलों का उल्लेख है। पहली मिसाइल रात करीब पौने एक बजे राजधानी के इलाके में गिरने की बात कही गई है। इसके बाद कुछ ही मिनटों के भीतर कई और मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया।
हमलों के बाद कीव के कई इलाकों में आग लगने और मकानों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई। ब्रोवरी इलाके में एक बच्चे और उसके दादा-दादी की मौत की भी जानकारी दी गई है। कई लोगों के लापता होने की बात कही गई है और राहत-बचाव दल उनकी तलाश में जुटे हैं।
सायरन बजते ही कर्मचारियों ने शेल्टर में ली पनाह
कीव में एक वेयरहाउस कर्मचारी मिखाइल हुकोव ने हमले की रात का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एयर रेड सायरन बजते ही उन्हें खतरे का अंदाजा हो गया था। उन्होंने कर्मचारियों को तुरंत शेल्टर में जाने का संदेश भेजा।
कुछ कर्मचारी अपना सामान लेने के लिए वापस जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। इसके कुछ ही देर बाद तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी। हुकोव के मुताबिक, धमाके इतने तेज थे कि ऐसा लगा जैसे विस्फोट बिल्कुल वेयरहाउस के आसपास हुआ हो।
धमाके में ट्रक में लगी आग, चालक ने भागकर बचाई जान
हमले के दौरान ट्रक चालक इवान ब्रागा भी इसकी चपेट में आ गए। उनके मुताबिक, वह ट्रक की कैब में मौजूद थे, तभी अचानक जोरदार धमाका हुआ और वाहन में आग लग गई। पास खड़े एक अन्य ट्रक में भी आग फैल गई।
ब्रागा ने बताया कि उन्हें जरूरी सामान और दस्तावेज निकालने का समय तक नहीं मिला। वह सिर्फ एक बैग लेकर बाहर निकल पाए। आग की गर्मी से उनके शरीर पर भी चोट आई, जिसके बाद उन्हें वहां से सुरक्षित स्थान की ओर जाना पड़ा।
रूस के ड्रोन और मिसाइल इस्तेमाल करने का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ ड्रोन और अन्य मिसाइल प्रणालियों का भी इस्तेमाल किया गया। कुल 151 ड्रोन और छह इस्कंदर-M बैलिस्टिक मिसाइलों के इस्तेमाल की बात कही गई है।
यूक्रेन की ओर से बड़ी संख्या में ड्रोन को मार गिराने का दावा किया गया है। हालांकि, बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में यूक्रेनी एयर डिफेंस को सीमित सफलता मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या यूक्रेन की एयर डिफेंस क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है?
रिपोर्ट में जुलाई के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि रूस ने उस महीने यूक्रेन के खिलाफ बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इनमें से सीमित संख्या को ही इंटरसेप्ट किए जाने की बात कही गई है।
इसी वजह से यूक्रेन की एयर डिफेंस क्षमता और विशेष रूप से पैट्रियट सिस्टम की उपलब्धता को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, यूक्रेन की वास्तविक परिचालन क्षमता और उपलब्ध सिस्टम को लेकर कई दावे सार्वजनिक रूप से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
एक ही रात में कई यूक्रेनी इलाकों में नुकसान
रूसी हमलों का असर केवल कीव तक सीमित रहने का दावा नहीं किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 7-8 अगस्त की रात यूक्रेन के कई प्रांतों में हमले हुए।
- जापोरिज्जिया: तीन लोगों की मौत और चार घायल होने की खबर।
- खारकीव: दो लोगों की मौत और सात घायल।
- सुमी: 19 लोगों के घायल होने की जानकारी।
- डोनेस्क: एक व्यक्ति की मौत और 15 घायल।
- खेरसान: दो लोगों की मौत और 26 घायल।
- ओडेसा: एक फुटबॉल स्टेडियम को नुकसान पहुंचने का दावा।
- नेप्रोपेट्रोवस्क: ड्रोन हमले में एक व्यक्ति के घायल होने की खबर।
इन आंकड़ों के मुताबिक, एक ही रात में यूक्रेन के कई हिस्से रूसी हमलों से प्रभावित हुए।
खारकीव की सड़कों पर 'मच्छरदानी' जैसे एंटी-ड्रोन नेट
खारकीव से सामने आई तस्वीरें युद्ध के बदलते स्वरूप की एक अलग तस्वीर पेश करती हैं। यहां कई सड़कों के ऊपर एंटी-ड्रोन नेट लगाए गए हैं, जो देखने में बड़े जाल या मच्छरदानी जैसे दिखाई देते हैं।
इनका उद्देश्य ड्रोन को सीधे सड़क पर मौजूद लोगों और वाहनों तक पहुंचने से रोकना है। रिपोर्ट के मुताबिक, महंगे एंटी-ड्रोन सिस्टम हर स्थान पर लगाना संभव नहीं होने के कारण कुछ इलाकों में इस तरह के उपाय अपनाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हमलों के बावजूद वे सामान्य जीवन जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं और युद्ध खत्म होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
काला सागर में भी बढ़ा तनाव
रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष का असर काला सागर में भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट में रूस की ओर से ओडेसा बंदरगाह के पास यूक्रेन के तीन कार्गो जहाजों को ड्रोन से निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है।
रूस का आरोप है कि इन जहाजों के जरिए NATO देशों से मिले सैन्य उपकरण और हथियार यूक्रेन पहुंचाए जा रहे थे। हालांकि, समुद्री हमलों से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
दूसरी ओर, यूक्रेन भी रूस की तथाकथित 'शैडो फ्लीट' को निशाना बनाने का दावा करता रहा है। यूक्रेन के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य रूस की समुद्री सप्लाई और ऊर्जा से जुड़ी गतिविधियों पर दबाव बनाना है।
ड्रोन युद्ध में तेजी से बदल रही रणनीति
रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन अब केवल निगरानी या हमले तक सीमित नहीं रह गए हैं। दोनों पक्ष अलग-अलग तरह के ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
रिपोर्ट में रूस के 'वुर्डलाक' नामक एक हेक्साकॉप्टर ड्रोन का भी उल्लेख किया गया है, जिसका इस्तेमाल सामान पहुंचाने के लिए किए जाने का दावा है। ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल युद्ध क्षेत्र में रसद, चिकित्सा सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।
इससे साफ है कि युद्ध में ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है और दोनों पक्ष अपनी रणनीतियों में तेजी से बदलाव कर रहे हैं।
यूक्रेनी ड्रोन ठिकानों पर हमले का भी दावा
पूर्वी यूक्रेन के डोनेस्क क्षेत्र में भी रूसी हमले जारी रहने की खबर है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डोब्रोपिलिया इलाके में यूक्रेनी ड्रोन ऑपरेशन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
रूस की ओर से इन ठिकानों पर हवाई बमों से हमला करने का दावा किया गया है। रूसी पक्ष का कहना है कि इन स्थानों से उसके सैनिकों के खिलाफ ड्रोन गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
रूस ने यूक्रेनी पूर्व सैनिकों की ब्रिगेड बनाई?
रिपोर्ट में रूस की ओर से कथित तौर पर यूक्रेनी पूर्व सैनिकों को शामिल करके एक नई स्वयंसेवी ब्रिगेड बनाए जाने का भी उल्लेख है। दावा है कि इसमें ऐसे लोग शामिल हैं जो युद्ध के दौरान रूस के कब्जे में आए थे।
यदि यह दावा सही है, तो स्थानीय इलाकों और सैन्य परिस्थितियों की जानकारी रखने वाले इन लोगों का इस्तेमाल रूस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, युद्धबंदियों को सैन्य गतिविधियों में इस्तेमाल करने का सवाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
जेलेंस्की सर्बिया पहुंचे, एयर डिफेंस मदद पर नजर
इधर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की सर्बिया पहुंचे हैं। उनकी यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन को लगातार हवाई हमलों का सामना करना पड़ रहा है और एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत को लेकर चर्चा जारी है।
सर्बिया को रूस के साथ अपेक्षाकृत करीबी संबंध रखने वाले यूरोपीय देशों में गिना जाता है। ऐसे में जेलेंस्की की यात्रा को कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
NATO की पूर्वी सीमा पर क्यों बढ़ी चिंता?
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर सबसे बड़ी चिंता अब NATO की पूर्वी सीमा को लेकर है। रिपोर्ट में पश्चिमी आकलनों का हवाला देते हुए रूस की भविष्य की सैन्य क्षमता और NATO देशों के साथ संभावित टकराव को लेकर चिंता जताई गई है।
हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि रूस ने NATO देशों पर हमला करने या उन पर कब्जे की किसी योजना से इनकार किया है। इसलिए रूस के संभावित NATO हमले से जुड़े दावों को फिलहाल संभावित परिदृश्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर।
रोमानिया में F-35 ड्रिल से बढ़ी हलचल
NATO की पूर्वी सीमा पर रोमानिया ने ड्रोन से निपटने की तैयारियों को लेकर F-35 लड़ाकू विमानों के साथ अभ्यास किया है। इसके अलावा बुल्गारिया में भी ड्रोन से जुड़ी एक घटना की जानकारी सामने आई है।
इन घटनाओं ने यूरोप के पूर्वी हिस्से में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। NATO देश लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि यूक्रेन युद्ध के दौरान किसी ड्रोन या मिसाइल घटना का सीधा असर उनके क्षेत्र में न पड़े।
क्या बाल्टिक देश बन सकते हैं अगला तनाव केंद्र?
रूस से सीमा साझा करने वाले एस्टोनिया और लातविया तथा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लिथुआनिया को लेकर भी पश्चिमी देशों में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं।
बाल्टिक क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे NATO और रूस के बीच संभावित तनाव का संवेदनशील क्षेत्र बनाती है। हालांकि, फिलहाल इन देशों पर रूसी हमले की कोई पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में किए जा रहे आकलन संभावित परिदृश्यों पर आधारित हैं।
अगर रूस और NATO आमने-सामने आए तो?
रूस और NATO के बीच सीधा सैन्य संघर्ष मौजूदा युद्ध को पूरी तरह नए स्तर पर पहुंचा सकता है। NATO देश यूक्रेन को सैन्य, खुफिया और अन्य सहायता दे रहे हैं, लेकिन यह अभी तक रूस और NATO के बीच प्रत्यक्ष युद्ध में तब्दील नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों और राजनीतिक टिप्पणीकारों की ओर से इस संभावित टकराव को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आते रहे हैं। ऐसे दावों को वास्तविक घटनाक्रम और आधिकारिक बयानों के संदर्भ में देखना जरूरी है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल: युद्ध कितना फैलेगा?
रूस-यूक्रेन युद्ध फिलहाल यूक्रेन की धरती पर केंद्रित है, लेकिन कीव पर लगातार हवाई हमले, काला सागर में सैन्य गतिविधियां और NATO की पूर्वी सीमा पर बढ़ती सतर्कता ने तनाव जरूर बढ़ा दिया है।
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि संघर्ष सीधे NATO क्षेत्र तक पहुंचने वाला है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि युद्ध का प्रभाव केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं है। आने वाले दिनों में हवाई हमलों की तीव्रता, काला सागर की स्थिति और NATO की प्रतिक्रिया इस पूरे संकट की दिशा तय करने वाले अहम कारक होंगे।