{"vars":{"id": "130921:5012"}}

Russia-Ukraine War: यूरोपीय देशों को पुतिन ने दी खुली चेतावनी, यूक्रेन में सैनिक भेजने पर क्या होगा?

Russia-Ukraine War: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने यूक्रेन में अपने सैनिक भेजे तो रूस इसे युद्ध मानेगा। भारत में BRICS समिट के बीच आए इस बयान से यूक्रेन युद्ध में पश्चिमी देशों की संभावित सैन्य भूमिका को लेकर तनाव बढ़ने के संकेत मिले हैं।
 

Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को कड़ी चेतावनी दी है। पुतिन ने साफ कहा कि अगर यूरोपीय देश यूक्रेन की जमीन पर अपने सैनिक भेजते हैं तो रूस इसे अपने खिलाफ युद्ध की कार्रवाई मानेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि रूस का यूरोपीय देशों को धमकाने का कोई इरादा नहीं है।

यूक्रेन में सैनिक भेजना यानी रूस से युद्ध: पुतिन

पुतिन ने कहा कि यूरोपीय देशों को रूस की ओर से किसी खतरे की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक रूस न तो यूरोप को धमकी दे रहा है और न ही ऐसा करने की उसकी कोई योजना है।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस के पास यूरोपीय देशों के साथ किसी संघर्ष में जाने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि रूस ने यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों से जुड़े मुद्दों को पहले ही सुलझा लिया था।

पुतिन ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान हो गया था। वहीं, सोवियत संघ के विघटन के बाद बनी व्यवस्थाएं भी रूस की सहमति से लागू की गई थीं। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं के खिलाफ जाने वाला कोई भी कदम रूस के हितों के खिलाफ होगा और अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा।

इसी संदर्भ में यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों की संभावित तैनाती को लेकर पुतिन ने सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर यूरोपीय देश यूक्रेन की जमीन पर सैनिक भेजने के बारे में सोच रहे हैं, तो इसका मतलब रूस के साथ युद्ध होगा।

पांचवें साल में पहुंचा रूस-यूक्रेन युद्ध

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और अब यह अपने पांचवें साल में पहुंच चुका है। युद्ध के दौरान कई यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को लगातार राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य समर्थन दिया है।

दूसरी ओर, अमेरिका ने संघर्ष को खत्म कराने और दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की है। इसी महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर ने मॉस्को की यात्रा की थी। इसके बाद दोनों ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी।

ऐसे समय में पुतिन का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यूक्रेन को पश्चिमी देशों के समर्थन और संभावित सैन्य भागीदारी को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।

BRICS समिट के लिए भारत पहुंचे हैं पुतिन

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में पुतिन के साथ मुलाकात की। यह बैठक BRICS सम्मेलन के औपचारिक उद्घाटन से पहले हुई।

दोनों नेताओं के बीच भारत-रूस व्यापार और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। बैठक में 'प्रोग्राम फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2030' को लागू करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी बात हुई।

दो हफ्ते से भी कम समय में मोदी-पुतिन की दूसरी मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार को हुई मुलाकात करीब दो हफ्ते से भी कम समय में दोनों नेताओं की दूसरी बैठक थी। इससे पहले दोनों नेता 31 अगस्त को बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान मिले थे।

BRICS सम्मेलन के बीच पुतिन की ओर से यूरोपीय देशों को दी गई यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब यूक्रेन युद्ध में पश्चिमी देशों की भूमिका को लेकर बहस जारी है। पुतिन ने स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों की तैनाती को रूस सीधे तौर पर अपने खिलाफ युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा।