Saudi Arabia Oil Crisis: ड्रोन हमले के बाद सऊदी की बड़ी तेल पाइपलाइन बंद, दुनिया में बढ़ा सप्लाई संकट
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक तेल बाजार पर एक और बड़ा दबाव बन गया है। सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को बंद कर दिया है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम है और हाल के महीनों में इसके जरिए रोजाना करीब 4 से 5 मिलियन बैरल कच्चा तेल पहुंचाया जा रहा था। यह मात्रा वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 4-5 प्रतिशत बैठती है। पाइपलाइन बंद होने से बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है और ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है।
ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने पाइपलाइन बंद की
सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद इसका संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, रियाद और मदीना क्षेत्रों में पाइपलाइन से जुड़े ठिकानों को कई ड्रोन से निशाना बनाया गया। इन ड्रोन के इराक से आने की बात कही गई है। हमले में लोग घायल हुए और पाइपलाइन के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।
रॉयटर्स के मुताबिक, यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर पहले से ज्यादा निर्भर था। इस पाइपलाइन के बंद होने से सऊदी तेल को वैकल्पिक रास्ते से बाहर भेजने की क्षमता पर सीधा असर पड़ा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, पाइपलाइन की मरम्मत में 3 से 5 सप्ताह तक का समय लग सकता है। इस दौरान तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए सऊदी अरब को दूसरे रास्तों और अपने भंडार पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा।
क्या है ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और क्यों है इतनी अहम?
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है। यह देश के पूर्वी हिस्से में स्थित तेल उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षेत्रों को पश्चिमी तट पर मौजूद यानबू बंदरगाह से जोड़ती है।
इस पाइपलाइन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सऊदी अरब इसके जरिए कच्चे तेल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करते हुए लाल सागर तक पहुंचा सकता है। वहां से तेल को टैंकरों के जरिए आगे यूरोप और एशिया के बाजारों तक भेजा जा सकता है।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को मूल रूप से इस रणनीतिक चिंता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया था कि किसी संघर्ष की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही बाधित हो सकती है। मौजूदा पश्चिम एशिया संकट में यही पाइपलाइन सऊदी तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता बन गई थी।
अब इस रास्ते के बंद होने से सऊदी अरब के सामने तेल निर्यात को दूसरे मार्गों से संचालित करने की चुनौती बढ़ गई है।
हूतियों के बढ़ते दबाव से लाल सागर का रास्ता भी खतरे में
सऊदी की पाइपलाइन बंद होने के साथ ही दूसरी बड़ी चिंता लाल सागर और बाब-अल-मंदेब को लेकर है। यमन के हूती विद्रोहियों ने इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं और रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण बढ़ाया है।
बाब-अल-मंदेब लाल सागर का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहां किसी भी बड़े व्यवधान का असर सिर्फ तेल टैंकरों पर नहीं बल्कि एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच होने वाले व्यापक समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हालिया ड्रोन हमले को उपलब्ध रिपोर्टों में इराक से आए ड्रोन से जोड़ा गया है; इसे सीधे हूती हमला कहना अभी सही नहीं होगा। हूती अलग मोर्चे पर लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में दबाव बढ़ा रहे हैं।
एक तरफ होर्मुज, दूसरी तरफ लाल सागर; दोनों रास्ते दबाव में
वैश्विक तेल बाजार के लिए समस्या इसलिए गंभीर है क्योंकि पश्चिम एशिया से तेल निकालने वाले प्रमुख समुद्री और पाइपलाइन रास्ते एक साथ प्रभावित हो रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से युद्ध से पहले रोजाना करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता था। संघर्ष के बाद यहां टैंकरों की आवाजाही काफी कम हुई है। हालांकि, कुछ जहाज अब भी इस रास्ते से गुजर रहे हैं, लेकिन सामान्य स्थिति की तुलना में ट्रैफिक काफी नीचे है।
दूसरी ओर, बाब-अल-मंदेब और लाल सागर में हूती गतिविधियों ने सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह से तेल भेजने के वैकल्पिक रास्ते को भी जोखिम में डाल दिया है।
यानी तेल बाजार के सामने समस्या सिर्फ एक पाइपलाइन के बंद होने की नहीं है। होर्मुज में कम आवाजाही, ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का बंद होना और लाल सागर में बढ़ता सुरक्षा जोखिम—तीनों मिलकर सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
रोजाना लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा
रिस्टैड एनर्जी के विश्लेषण के मुताबिक, अगस्त के आखिर से ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यानबू के जरिए रोजाना करीब 2.6 से 4 मिलियन बैरल तेल की आवाजाही हो रही थी। वहीं अन्य विश्लेषणों में हाल के महीनों में इस पाइपलाइन से 4-5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक की आवाजाही का अनुमान दिया गया है।
यह वैश्विक तेल बाजार के लिए छोटी मात्रा नहीं है। रोजाना करीब 4 मिलियन बैरल का प्रवाह दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 4 प्रतिशत हो सकता है।
इसी वजह से पाइपलाइन के कई सप्ताह तक बंद रहने की आशंका ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब के पास कुछ समय तक अपने भंडार के जरिए निर्यात बनाए रखने का विकल्प है, लेकिन अगर पाइपलाइन बंद रहने की अवधि लंबी हुई या दूसरे समुद्री रास्तों पर भी व्यवधान बढ़ा, तो दबाव तेजी से बढ़ सकता है।
ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के पार, आगे और बढ़ सकती है महंगाई
सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया और कारोबार के दौरान इसकी कीमत करीब 108 डॉलर तक पहुंच गई।
तेल की कीमत बढ़ने का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन महंगा होने पर खाद्य पदार्थों, कृषि उत्पादों, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की दूसरी वस्तुओं की लागत भी बढ़ सकती है।
खासकर डीजल की कीमत में बढ़ोतरी का असर ज्यादा व्यापक होता है। लंबी दूरी के ट्रक, डिलीवरी वाहन, कृषि मशीनरी और कई औद्योगिक गतिविधियां डीजल पर निर्भर हैं। इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकती हैं।
अमेरिका समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों पर असर
मध्य पूर्व की सप्लाई बाधाओं का असर पहले ही कई देशों के ईंधन बाजारों में दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, नाइजीरिया में डीजल की कीमतें फरवरी के अंत की तुलना में करीब 92 प्रतिशत, जबकि पेट्रोल करीब 61 प्रतिशत महंगा हुआ है।
इंडोनेशिया में डीजल की कीमत करीब 87 प्रतिशत और पेट्रोल करीब 38 प्रतिशत बढ़ा है। लेबनान में डीजल करीब 80 प्रतिशत और पेट्रोल करीब 46 प्रतिशत महंगा हुआ है।
| देश | डीजल कीमत में वृद्धि | पेट्रोल कीमत में वृद्धि |
|---|---|---|
| नाइजीरिया | 92% | 61% |
| इंडोनेशिया | 87% | 38% |
| लेबनान | 80% | 46% |
अमेरिका में भी स्थिति चिंताजनक है। AAA के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को नियमित पेट्रोल की औसत कीमत करीब $4.32 प्रति गैलन थी, जबकि डीजल की औसत कीमत करीब $6.23 प्रति गैलन तक पहुंच गई। रिपोर्ट में डीजल की यह कीमत रिकॉर्ड स्तर बताई गई है।
| ईंधन | युद्ध से पहले | सोमवार की कीमत | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| पेट्रोल | $2.98/गैलन | $4.32/गैलन | करीब 45% |
| डीजल | $3.75/गैलन | $6.23/गैलन | करीब 66% |
तेल संकट बढ़ा तो आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर पश्चिम एशिया में तेल की सप्लाई बाधित रहने की अवधि बढ़ती है, तो इसका असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। सबसे पहले पेट्रोल, डीजल और घरेलू ऊर्जा की लागत बढ़ सकती है। इसके बाद ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होने से खाद्य पदार्थों और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों की चिंता खास तौर पर डीजल को लेकर है, क्योंकि इसका इस्तेमाल परिवहन के अलावा खेती और माल ढुलाई में बड़े पैमाने पर होता है। अमेरिका में फसल कटाई और हीटिंग सीजन से पहले डीजल की ऊंची कीमतें अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती हैं।