ईरान युद्ध में अमेरिका पड़ता दिख रहा अकेला, कई सहयोगी देशों ने सैन्य मदद से किया इनकार
New Delhi : ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के युद्ध को करीब पांच हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं। इस बीच अमेरिका के कई सहयोगी देशों ने ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया और अब इटली जैसे देशों ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में सीधे शामिल होने से दूरी बना ली है। ऐसे में इस संघर्ष में अमेरिका कूटनीतिक तौर पर कुछ हद तक अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव
मामले का केंद्र बना हुआ है Strait of Hormuz, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर ईरान इस मार्ग को नहीं खोलता है, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है।
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने सहयोगी देशों से यह भी संकेत दिया है कि वे सैन्य अभियान को सीमित करने पर विचार कर सकते हैं, भले ही यह जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद क्यों न रहे।
अमेरिका में भी बढ़ रहा विरोध
ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका के अंदर भी राजनीतिक और जनमत का विरोध सामने आ रहा है। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े सैन्य कदम से पहले सरकार ने देश के भीतर पर्याप्त सहमति नहीं बनाई।
ब्रिटेन ने युद्ध में शामिल होने से किया इनकार
ईरान के साथ जारी संघर्ष में ब्रिटेन के पीछे हटने को अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ कहा कि यह उनकी लड़ाई नहीं है और ब्रिटेन इस युद्ध में शामिल नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूके अपने एयरस्पेस या सेना को इस संघर्ष के लिए उपलब्ध नहीं कराएगा, हालांकि कूटनीतिक स्तर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के प्रयास जारी रहेंगे।
स्पेन और इटली ने भी नहीं दिया साथ
ब्रिटेन से पहले स्पेन ने भी अमेरिका को झटका देते हुए युद्ध में शामिल विमानों को अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा स्पेन ने अपने रोटा और मोरोन सैन्य बेस के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी। वहीं इटली ने भी अमेरिकी बॉम्बर्स को मिडिल ईस्ट जाने से पहले अपने एयरबेस पर उतरने की अनुमति नहीं दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इटली का कहना है कि अमेरिका ने इस संबंध में औपचारिक अनुमति नहीं मांगी थी और सैन्य नेतृत्व से चर्चा भी नहीं की गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सहयोगी देश इस तरह दूरी बनाए रखते हैं, तो ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को आगे बढ़ाना अमेरिका के लिए और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी इसका असर बना रह सकता है।