ईरान युद्ध के बीच तेल संकट गहराया, मई तक डगमगा सकती है विश्व अर्थव्यवस्था
Mar 26, 2026, 21:54 IST
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को अब चार हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ईरान पहले ही खारिज कर चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। कई देशों में ऊर्जा आपातकाल जैसे हालात बनने लगे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल तेज हो गई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: बढ़ सकता है वैश्विक संकट
ऊर्जा अर्थशास्त्री अनस अल्हाजी (Anas Alhajji) ने मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर ईरान से जुड़ा यह संघर्ष जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए चेतावनी दी कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो कुछ ही हफ्तों में इसके गंभीर आर्थिक परिणाम सामने आने लगेंगे। खासकर ऊर्जा आपूर्ति में बाधा से वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर पड़ेगा।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का मतलब है—तेल सप्लाई पर बड़ा संकट।
इसका असर अब मिडिल ईस्ट से बाहर निकलकर यूरोप तक दिखाई देने लगा है, जहां ऊर्जा संकट तेजी से गहराता जा रहा है।
यूरोप में बढ़ेगी रूस पर निर्भरता?
अनस अल्हाजी के अनुसार, यूरोप में ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रूस से तेल और गैस पर निर्भरता फिर बढ़ सकती है, जबकि पिछले कुछ वर्षों से यूरोप इस निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा था। यह स्थिति वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।
एशिया में बेकाबू हो सकते हैं तेल के दाम
एशियाई बाजारों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो कीमतों में और उछाल आ सकता है।
इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा, ईंधन महंगा होगा, परिवहन लागत बढ़ेगी और महंगाई में तेजी आ सकती है।ईरान युद्ध के बीच तेल संकट गहराया, मई तक डगमगा सकती है विश्व अर्थव्यवस्था नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को अब चार हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ईरान पहले ही खारिज कर चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। कई देशों में ऊर्जा आपातकाल जैसे हालात बनने लगे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल तेज हो गई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: बढ़ सकता है वैश्विक संकट
ऊर्जा अर्थशास्त्री अनस अल्हाजी (Anas Alhajji) ने मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर ईरान से जुड़ा यह संघर्ष जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए चेतावनी दी कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो कुछ ही हफ्तों में इसके गंभीर आर्थिक परिणाम सामने आने लगेंगे। खासकर ऊर्जा आपूर्ति में बाधा से वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर पड़ेगा।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का मतलब है- तेल सप्लाई पर बड़ा संकट।
इसका असर अब मिडिल ईस्ट से बाहर निकलकर यूरोप तक दिखाई देने लगा है, जहां ऊर्जा संकट तेजी से गहराता जा रहा है।
यूरोप में बढ़ेगी रूस पर निर्भरता?
अनस अल्हाजी के अनुसार, यूरोप में ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रूस से तेल और गैस पर निर्भरता फिर बढ़ सकती है, जबकि पिछले कुछ वर्षों से यूरोप इस निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा था।
यह स्थिति वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।
एशिया में बेकाबू हो सकते हैं तेल के दाम
एशियाई बाजारों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो कीमतों में और उछाल आ सकता है।
इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा—ईंधन महंगा होगा, परिवहन लागत बढ़ेगी और महंगाई में तेजी आ सकती है।
इस बीच दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। कई देशों में ऊर्जा आपातकाल जैसे हालात बनने लगे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल तेज हो गई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: बढ़ सकता है वैश्विक संकट
ऊर्जा अर्थशास्त्री अनस अल्हाजी (Anas Alhajji) ने मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर ईरान से जुड़ा यह संघर्ष जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए चेतावनी दी कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो कुछ ही हफ्तों में इसके गंभीर आर्थिक परिणाम सामने आने लगेंगे। खासकर ऊर्जा आपूर्ति में बाधा से वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर पड़ेगा।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का मतलब है—तेल सप्लाई पर बड़ा संकट।
इसका असर अब मिडिल ईस्ट से बाहर निकलकर यूरोप तक दिखाई देने लगा है, जहां ऊर्जा संकट तेजी से गहराता जा रहा है।
यूरोप में बढ़ेगी रूस पर निर्भरता?
अनस अल्हाजी के अनुसार, यूरोप में ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रूस से तेल और गैस पर निर्भरता फिर बढ़ सकती है, जबकि पिछले कुछ वर्षों से यूरोप इस निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा था। यह स्थिति वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।
एशिया में बेकाबू हो सकते हैं तेल के दाम
एशियाई बाजारों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो कीमतों में और उछाल आ सकता है।
इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा, ईंधन महंगा होगा, परिवहन लागत बढ़ेगी और महंगाई में तेजी आ सकती है।ईरान युद्ध के बीच तेल संकट गहराया, मई तक डगमगा सकती है विश्व अर्थव्यवस्था नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को अब चार हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ईरान पहले ही खारिज कर चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। कई देशों में ऊर्जा आपातकाल जैसे हालात बनने लगे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल तेज हो गई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: बढ़ सकता है वैश्विक संकट
ऊर्जा अर्थशास्त्री अनस अल्हाजी (Anas Alhajji) ने मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर ईरान से जुड़ा यह संघर्ष जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए चेतावनी दी कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो कुछ ही हफ्तों में इसके गंभीर आर्थिक परिणाम सामने आने लगेंगे। खासकर ऊर्जा आपूर्ति में बाधा से वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर पड़ेगा।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का मतलब है- तेल सप्लाई पर बड़ा संकट।
इसका असर अब मिडिल ईस्ट से बाहर निकलकर यूरोप तक दिखाई देने लगा है, जहां ऊर्जा संकट तेजी से गहराता जा रहा है।
यूरोप में बढ़ेगी रूस पर निर्भरता?
अनस अल्हाजी के अनुसार, यूरोप में ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रूस से तेल और गैस पर निर्भरता फिर बढ़ सकती है, जबकि पिछले कुछ वर्षों से यूरोप इस निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा था।
यह स्थिति वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।
एशिया में बेकाबू हो सकते हैं तेल के दाम
एशियाई बाजारों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो कीमतों में और उछाल आ सकता है।
इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा—ईंधन महंगा होगा, परिवहन लागत बढ़ेगी और महंगाई में तेजी आ सकती है।