ट्रंप का ट्रिपल अटैक: अब क्यूबा, कनाडा और ब्रिटेन पर सख्त तेवर, अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर उबाल
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने घरेलू विरोध के बीच क्यूबा, कनाडा और ब्रिटेन पर सख्त रुख अपनाया है। क्यूबा को तेल देने वालों पर टैरिफ, कनाडा के विमानों पर शुल्क और ब्रिटेन-चीन रिश्तों पर चेतावनी दी गई। वहीं अमेरिका में इमिग्रेशन नीतियों के खिलाफ 46 राज्यों में हड़ताल हुई।
US Immigration Protest: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर आक्रामक और धमकाने वाले रुख में नजर आए हैं। घरेलू मोर्चे पर इमिग्रेशन नीतियों को लेकर बढ़ते विरोध और संभावित सरकारी शटडाउन के बीच ट्रंप ने एकसाथ तीन देशों, क्यूबा, कनाडा और ब्रिटेन को निशाने पर लिया है। जानकार इसे घरेलू दबाव से ध्यान भटकाने की रणनीति मान रहे हैं।
रायटर के अनुसार, ट्रंप ने क्यूबा को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए चेतावनी दी है कि क्यूबा को तेल सप्लाई करने वाले किसी भी देश पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इस संबंध में उन्होंने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करते हुए एक कार्यकारी आदेश को मंजूरी दी है, हालांकि टैरिफ की दरों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। क्यूबा सरकार ने इस फैसले को गंभीर बताते हुए कहा है कि इससे बिजली उत्पादन, कृषि और जल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है।
वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कनाडा को भी सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कनाडा ने अमेरिकी कंपनी गल्फस्ट्रीम के कुछ बिजनेस जेट विमानों को मंजूरी नहीं दी, तो अमेरिका कनाडा में बने सभी विमानों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है।
ब्रीटेन-चीन की बढ़ती नजदीकी से ट्रंप बौखलाए
इधर, ट्रंप ने ब्रिटेन की चीन के साथ बढ़ती आर्थिक नजदीकी पर भी नाराजगी जताई है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर द्वारा चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के बयान पर ट्रंप ने इसे ‘खतरनाक’ करार दिया, हालांकि इसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की।
इमिग्रेशन नीतियों के खिलाफ उबाल
इन अंतरराष्ट्रीय बयानों के बीच अमेरिका के भीतर ट्रंप की इमिग्रेशन नीतियों के खिलाफ असंतोष चरम पर है। शुक्रवार को 46 अमेरिकी राज्यों में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया। प्रदर्शनकारियों ने ‘नो वर्क, नो स्कूल, नो शॉपिंग’ का नारा देते हुए जनजीवन ठप करने की कोशिश की। इस दौरान मिनियापोलिस में प्रदर्शन की कवरेज कर रहे वरिष्ठ पत्रकार छान लेमोन की गिरफ्तारी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।