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ट्रंप का बड़ा ऐलान! भारतीय जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाने की तैयारी, अरबों डॉलर के निर्यात पर मंडराया खतरा

 

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप के अनुसार इस नीति का उद्देश्य दवा निर्माण को दोबारा अमेरिका में बढ़ावा देना और घरेलू फार्मास्युटिकल उद्योग को मजबूत करना है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से लागू होने वाली नई नीति के तहत पहले दो वर्षों तक अमेरिका में आयात की जाने वाली जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। इसके बाद तीसरे वर्ष टैरिफ 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कंपनियों को तय समयसीमा के भीतर अमेरिका में उत्पादन इकाइयां और आवश्यक उपकरण स्थापित करने होंगे। ऐसा नहीं करने वाली कंपनियों पर आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा।

क्या है इस फैसले का उद्देश्य?

ट्रंप का कहना है कि यह नीति अमेरिका में दवा निर्माण को वापस लाने और देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेटेंटेड, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं से जुड़ी मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

भारत पर क्यों पड़ सकता है बड़ा असर?

भारत को दुनिया की 'फार्मेसी' कहा जाता है और वह बड़ी मात्रा में किफायती जेनेरिक दवाएं दुनिया भर में निर्यात करता है। अमेरिका भारतीय जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा बाजार है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात कीं। यह भारत के कुल 25.8 अरब डॉलर के वैश्विक दवा निर्यात का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा है। अमेरिकी बाजार में भारतीय जेनेरिक दवाओं की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत मानी जाती है।

फार्मा कंपनियों की बढ़ सकती है चिंता

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित टैरिफ भारतीय दवा कंपनियों पर किस स्तर तक प्रभाव डालेगा। उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका के बीच फरवरी में हुए व्यापार समझौते में जेनेरिक दवाओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर सहमति बनी थी। अब ट्रंप की नई घोषणा के बाद भारतीय फार्मा उद्योग की नजर अमेरिका की आगामी व्यापारिक नीति और उसके अंतिम स्वरूप पर टिकी है।