ईरान डील पर ट्रंप का गेम प्लान! फेल हुई बातचीत तो किसे ठहराएंगे जिम्मेदार?
Washington/Tehran : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता अब सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। सवाल उठ रहा है कि अगर कोई समझौता नहीं होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किस पर डाली जाएगी।
वेंस पर क्यों टिकी नजर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुराने राजनीतिक पैटर्न के मुताबिक सफलता का श्रेय खुद लेने और असफलता का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की रणनीति फिर देखने को मिल सकती है। ऐसे में जेडी वेंस को वार्ता प्रक्रिया में आगे कर दिया गया है, जिससे वे संभावित “टारगेट” बन सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वेंस को ऐसे मिशन में आगे किया गया है, जहां जोखिम ज्यादा और फायदा सीमित है। माना जा रहा है कि अगर बातचीत विफल रहती है, तो 2028 के चुनावी समीकरण में उनकी छवि को नुकसान हो सकता है।
ट्रंप के बयान से बढ़ी बहस
हाल ही में ईस्टर लंच के दौरान ट्रंप के एक बयान ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा था—“अगर डील नहीं होती तो मैं जेडी वेंस को दोष दूंगा, और अगर हो जाती है तो श्रेय मैं लूंगा।” इस बयान को लेकर उनके इरादों पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपब्लिकन खेमे में यह चर्चा भी तेज है कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो इजराइल को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। जैसे-जैसे सकारात्मक नतीजों की संभावना घट रही है, वैसे-वैसे विकल्पों की तलाश भी बढ़ रही है।
क्या हो सकता है ‘गुड-इश’ समझौता?
विशेषज्ञों के अनुसार, एक संभावित समझौते के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है और बदले में अमेरिका फारस की खाड़ी से अपनी सैन्य मौजूदगी कम कर सकता है। हालांकि इसे पूर्ण समाधान नहीं माना जा रहा है।
मौजूदा हालात में सबसे बड़ा जोखिम क्षेत्रीय युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट का है। सैन्य कार्रवाई की स्थिति में बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है, जबकि बिना शर्त पीछे हटना अमेरिका की वैश्विक छवि को प्रभावित कर सकता है।
दबाव में ट्रंप की रणनीति
ट्रंप की रणनीति “डर और दबाव” के जरिए ईरान को समझौते के लिए मजबूर करने की रही है। लेकिन अगर वार्ता विफल होती है, तो आगे की रणनीति क्या होगी—इस पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।