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बलूचिस्तान में फिदायीन हमलों के पीछे दो महिला हमलावर, BLA ने तस्वीरें जारी कर बताई कैसे रची साजिश

 

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हुए भीषण फिदायीन हमलों को लेकर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बड़ा दावा किया है। संगठन ने इन हमलों में शामिल दो महिला हमलावरों की तस्वीरें जारी करते हुए कहा है कि इन्हीं के जरिए कई शहरों और कस्बों में एक साथ हमलों को अंजाम दिया गया।

BLA के मुताबिक, पहली महिला हमलावर की पहचान 24 वर्षीय आसिफा मेंगल के रूप में की गई है। वह नुश्की इलाके की रहने वाली थी और मोहम्मद इस्माइल की बेटी बताई जा रही है। संगठन का दावा है कि आसिफा ने अपने 21वें जन्मदिन पर BLA की मजीद ब्रिगेड जॉइन की थी और जनवरी 2024 में आत्मघाती हमलावर बनने का फैसला किया। BLA का कहना है कि नुश्की में ISI मुख्यालय पर हमला उसी ने किया था।

दूसरी महिला हमलावर की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर हमले से पहले अपने साथियों के साथ नजर आ रही है। वीडियो में वह पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ बयान देती दिखाई देती है।

एक साथ कई इलाकों में हमले

BLA के अनुसार, इन फिदायीन हमलों को एक सुनियोजित रणनीति के तहत अंजाम दिया गया। हमलावर आम नागरिकों के कपड़ों में स्कूलों, बाजारों, बैंकों और अस्पतालों में घुसे और अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। ये हमले शुक्रवार रात शुरू हुए और शनिवार तक जारी रहे। नुश्की, ग्वादर, चमन, हब, नसीराबाद और मकरान समेत कई इलाकों में हमलों की खबरें सामने आईं।

सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई

हमलों के बाद पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 40 घंटे तक चली कार्रवाई में 140 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराने का दावा किया गया है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी पुष्टि की है कि इन हमलों में महिला हमलावर शामिल थीं।

लंबे समय से अशांत है बलूचिस्तान

BLA ने बताया कि ये हमले उनके ‘हेरोफ’ यानी ‘ब्लैक स्टॉर्म’ अभियान का हिस्सा हैं। वहीं, पाकिस्तानी सेना का कहना है कि किसी भी शहर या महत्वपूर्ण ठिकाने पर आतंकियों को कब्जा नहीं करने दिया गया। बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे गरीब प्रांत है, जहां वर्षों से हिंसा जारी है। बलूच संगठन लंबे समय से ज्यादा अधिकार और प्राकृतिक संसाधनों में हिस्सेदारी की मांग करते रहे हैं।