अमेरिका जाने वाले भारतीयों पर बढ़ेगा खर्च! H-1B वीजा एक्सटेंशन पर नई फीस लागू करने की तैयारी
H-1B Visa Extension Fee: अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों और उन्हें रोजगार देने वाली कंपनियों पर जल्द ही अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। अमेरिकी प्रशासन H-1B और L-1 वीजा के एक्सटेंशन (Renewal/Extension) पर भी अतिरिक्त 9/11 Response and Biometric Entry-Exit Fee लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब तक यह शुल्क केवल कुछ शुरुआती वीजा याचिकाओं और नियोक्ता बदलने के मामलों में लागू था, लेकिन नए नियम के बाद वीजा विस्तार भी इसके दायरे में आ जाएगा।
क्या बदलने जा रहा है?
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के प्रस्तावित अंतिम नियम के अनुसार, कुछ श्रेणी के नियोक्ताओं को H-1B और L-1 वीजा धारकों के एक्सटेंशन आवेदन पर भी अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इसका उद्देश्य 9/11 Response और Biometric Entry-Exit सिस्टम के संचालन और आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना बताया गया है।
किन कंपनियों पर लागू होगा नियम?
यह अतिरिक्त शुल्क हर कंपनी पर लागू नहीं होगा। यह उन नियोक्ताओं पर लागू होगा, जिनके अमेरिका में 50 या उससे अधिक कर्मचारी हैं, जिनके 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी H-1B या L-1 वीजा पर कार्यरत हैं। ऐसी कंपनियों को अब वीजा एक्सटेंशन के समय भी अतिरिक्त शुल्क जमा करना होगा।
कितनी होगी अतिरिक्त फीस?
प्रस्तावित नियम के तहत-
- H-1B वीजा एक्सटेंशन पर 4,000 अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त शुल्क।
- L-1 वीजा एक्सटेंशन पर 4,500 अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त शुल्क।
यह शुल्क पहले केवल शुरुआती याचिका या नियोक्ता बदलने की स्थिति में लागू था, लेकिन अब विस्तार (Extension) भी इसके दायरे में शामिल किया जा रहा है।
भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर क्यों?
H-1B वीजा का सबसे अधिक लाभ भारतीय आईटी पेशेवरों और भारतीय आईटी कंपनियों को मिलता है। अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ इसी वीजा पर कार्यरत हैं। ऐसे में यदि एक्सटेंशन पर भी अतिरिक्त शुल्क लागू होता है, तो भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और इसका असर नई भर्ती एवं वीजा विस्तार की रणनीति पर पड़ सकता है।
सरकार का क्या तर्क है?
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह शुल्क Biometric Entry-Exit System को मजबूत करने, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों के वित्तपोषण और सभी प्रकार की H-1B तथा L-1 याचिकाओं पर समान नियम लागू करने के उद्देश्य से बढ़ाया जा रहा है। DHS का मानना है कि इससे इमिग्रेशन निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
क्या होगा आगे?
यह नियम अमेरिकी प्रशासन की अंतिम प्रक्रिया के बाद लागू होगा। नियम लागू होने पर संबंधित कंपनियों को H-1B और L-1 कर्मचारियों के वीजा एक्सटेंशन के लिए पहले की तुलना में अधिक खर्च उठाना पड़ेगा। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव खासतौर पर भारतीय आईटी कंपनियों और अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवरों पर दिखाई दे सकता है।